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अक्षय कुमार की हीरोइन…जिसके प्यार में दीवाना हो गया था क्रिकेटर, पत्नी-पिता-बेटे को छोड़ लिव इन में रहा, करियर भी बर्बाद

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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे नाम रहे हैं जिन्होंने अपनी स्विंग गेंदबाजी से बल्लेबाजों को छकाया. लेकिन मैदान के बाहर अपनी निजी जिंदगी की ‘गुगली’ से वे खुद भी सुर्खियों में रहे. इन्हीं में से एक नाम है टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर मनोज प्रभाकर का. प्रभाकर अपनी धारदार गेंदबाजी और ओपनिंग के लिए जितने मशहूर थे. उतने ही चर्चित रहे अपनी लव लाइफ को लेकर. 90 के दशक की एक सुपरहिट अभिनेत्री के साथ उनकी प्रेम कहानी किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है, जिसमें प्यार, कानूनी पेच और करियर की कुर्बानी जैसे तमाम रंग मौजूद हैं. कहानी शुरू होती है साल 1993 से. उस समय मनोज प्रभाकर भारतीय क्रिकेट टीम के एक स्मार्ट, हैंडसम और डेशिंग खिलाड़ी के तौर पर पहचान बना चुके थे. दूसरी तरफ, बॉलीवुड में एक नया चेहरा अपनी मासूमियत और ‘माधुरी दीक्षित’ जैसी झलक के लिए रातों-रात स्टार बन गया था फरहीन. फिल्म ‘जान तेरे नाम’ की सफलता के बाद फरहीन हर बड़े डायरेक्टर की पसंद बन चुकी थीं.

अजीब इत्तेफाक था कि जिसे पूरी दुनिया जानती थी, उसे फरहीन (Farheen) नहीं जानती थीं. मुंबई के एक जिम में जब मनोज प्रभाकर (Manoj Prabhakar) ट्रीटमेंट के लिए पहुंचे, तो वहां मौजूद भीड़ उनके ऑटोग्राफ के लिए पागल हो गई. फरहीन उस जिम की रेगुलर मेंबर थी. उन्हें क्रिकेट में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं थी. उन्होंने भीड़ देखकर बड़ी मासूमियत से बगल वाले से पूछ लिया. ये बहुत गुड लुकिंग और हैंडसम इंसान कौन है? किस्मत का खेल देखिए, फरहीन ने यह बात इतनी जोर से कही कि खुद मनोज प्रभाकर ने इसे सुन लिया. जब फरहीन को पता चला कि वह कोई साधारण शख्स नहीं बल्कि देश के बड़े क्रिकेटर हैं, तो वह माफी मांगने पहुंचीं. इसी ‘सॉरी’ से बातों का सिलसिला शुरू हुआ. मनोज ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया. आपने हमें नहीं पहचाना, लेकिन हमने आपको पहचान लिया.

मनोज प्रभाकर 90 के दौरे के स्टार ऑलराउंडर थे.

दोस्ती, दर्द और सहारा
मनोज प्रभाकर और फरहीन की शुरुआत सीधे प्यार से नहीं हुई थी. मनोज उस वक्त अपनी पहली शादी में गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे. वह मानसिक रूप से परेशान थे और उन्हें किसी ऐसे साथी की जरूरत थी जो उनकी बातों को सुन सके. फरहीन, जो उम्र में मनोज से करीब 10 साल छोटी थीं, उनके लिए एक मजबूत भावनात्मक सहारा (Support System) बन गईं. फरहीन का कहना था कि उन्होंने कभी मनोज को उनकी शादी को लेकर कोई मशविरा नहीं दिया, क्योंकि वह खुद बहुत कम उम्र की थीं. लेकिन उन्होंने मनोज का हाथ थामे रखा. धीरे-धीरे यह दोस्ती उस गहरे एहसास में बदल गई जिसे दुनिया ‘प्यार’ कहती है.

तलाक से पहले निकाह और ‘लिव-इन’ का टैग
मनोज प्रभाकर और फरहीन का रिश्ता उस दौर में काफी विवादों में भी रहा. इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि मनोज शादीशुदा थे और उनका पहली पत्नी से तलाक नहीं हुआ था.लेकिन प्यार के आगे समाज की बंदिशें छोटी पड़ गईं. दोनों ने एक बीच का रास्ता निकाला. साल 1994 में मुस्लिम कानून के हिसाब से दोनों ने निकाह कर लिया. हालांकि, भारतीय कानून (हिंदू मैरिज एक्ट) के हिसाब से यह रिश्ता तब तक पूरी तरह वैध नहीं था जब तक कि मनोज का तलाक न हो जाए. इसी कारण कई सालों तक वे एक तरह से ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में रहे. यह इंतजार छोटा नहीं था. पूरे 15 साल बाद, यानी 2008 में जब मनोज प्रभाकर का उनकी पहली पत्नी से कानूनी तौर पर तलाक हुआ, तब जाकर 2009 में उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से दोबारा शादी की. इस शादी की खास बात यह थी कि उनके दोनों बेटे भी अपने पैरेंट्स के फेरों के गवाह बने.

इश्क में डूबा करियर
फरहीन का करियर जिस तेजी से ऊपर गया था, उतनी ही तेजी से वह अचानक गायब भी हो गईं. लोगों ने कयास लगाए कि शायद मनोज ने उन्हें काम करने से रोका, लेकिन सच्चाई इसके उलट थी. फरहीन ने खुद खुलासा किया कि वह जो भी करती हैं, उसमें अपना 100 फीसदी एफर्ट देती . जब उन्हें मनोज प्रभाकर से प्यार हुआ, तो उनकी प्राथमिकताएं बदल गईं.वह अक्षय कुमार जैसे सुपरस्टार्स के साथ फिल्में कर रही थीं, लेकिन उनका मन शूटिंग से ज्यादा मनोज के क्रिकेट मैचों में लगता था.जहां-जहां मनोज मैच खेलने जाते, फरहीन उनके पीछे-पीछे वहां पहुंच जातीं.प्रोड्यूसर उन्हें सेट पर ढूंढते रहते, उनकी डेट्स बर्बाद होतीं, लेकिन फरहीन के लिए उस वक्त केवल मनोज का साथ मायने रखता था.मात्र 21 साल की उम्र में उन्होंने अपने चमकते करियर को प्यार की खातिर पीछे छोड़ दिया.

दादी बनीं अभिनेत्री और एक मुकम्मल परिवार
आज मनोज प्रभाकर और फरहीन दिल्ली में एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं. फरहीन अब फिल्मों से दूर एक सफल बिजनेसवुमन हैं. उनकी कहानी की सबसे बड़ी खूबसूरती उनका परिवार है. मनोज की पहली पत्नी से हुआ बेटा भी आज उन्हीं के साथ रहता है और उनके बिजनेस में हाथ बंटाता है. दिलचस्प बात यह है कि 90 के दशक की वह ‘जान तेरे नाम’ वाली लड़की आज 50 साल की उम्र में दादी भी बन चुकी हैं. मनोज प्रभाकर का साथ पाकर फरहीन को कभी अपने करियर छोड़ने का मलाल नहीं हुआ. उन्होंने साबित कर दिया कि कभी-कभी जिंदगी के असली ‘छक्के-चौके’ मैदान पर नहीं, बल्कि रिश्तों को निभाने में लगाए जाते हैं.



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