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JAL-Ultrateck Conflict : जेपी एसोसिएट्स को खरीदने के लिए अडानी समूह की बोली को एनसीएलटी ने मंजूरी दी और इसके तत्काल बाद ही अल्ट्राटेक के साथ 10 साल से जारी विवाद भी सुलझ गया. जेपी समूह और अल्ट्राटेक का विवाद साल 2017 में शुरू हुआ था, जब जेपी समूह ने कर्ज बढ़ने की वजह से अपनी 6 सीमेंट यूनिट और खदानों को बेचने का सौदा किया था.
जेपी समूह और अल्ट्राटेक के बीच 10 साल से जारी विवाद सुलझ गया है.
नई दिल्ली. दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी के हाथ डालते ही कर्ज से लदी कंपनी जेपी एसोसिएट्स और सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक कंपनी के बीच 10 साल से जारी विवाद अब खत्म हो गया है. आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के जरिये इस विवाद के सुलझने से तीनों पक्षों को फायदा हुआ है. अल्ट्राटेक ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया है कि उसने यूपी की डल्ला सुपर यूनिट और संबंधित खानों को लेकर जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के साथ मध्यस्थता विवाद का निपटारा कर लिया है.
अल्ट्राटेक सीमेंट ने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्थित डल्ला सुपर यूनिट और खानों के लिए एस्क्रो खाते में रखे गए 1,00,000 तरजीही शेयर (सीरीज ए आरपीएस) जिनमें प्रत्येक का अंकित मूल्य 1,00,000 रुपये था और कुल मिलाकर 1,000 करोड़ रुपये बनते थे, अब जारी कर दिए गए हैं. इस समझौते से कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में जेएएल की संपत्तियों के मौद्रीकरण में मदद मिलेगी. अडानी समूह ने जेएएल को खरीदने के लिए 14,535 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, जिसे एनसीएलटी ने मंजूर कर लिया है, लेकिन वेदांता समूह ने इसे चुनौती दी है.
मामला तो सुलझा पर अडानी समूह की बढ़ी चुनौती
अल्ट्राटेक और अडानी दोनों ही सीमेंट क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं और अडानी समूह अपनी मौजूदा फैक्ट्रियों में अधिग्रहण और विस्तार के जरिये उत्पादन बढ़ा रहा है. इस समझौते के बाद अल्ट्राटेक और कर्ज में डूबी जेएएल के बीच लंबे समय से जारी विवाद का अंत हो गया है. अल्ट्राटेक ने कहा कि 26 मार्च, 2026 को मध्यस्थता के समझौते और अंतिम निर्णय के बाद डल्ला सुपर यूनिट और खानों में सभी अधिकार पूरी तरह से कंपनी को मिल गए हैं और इससे जुड़े सभी दावे, आय और जिम्मेदारियां समाप्त हो गई हैं. हालांकि, इससे वह सीमेंट बाजार में और मजबूत हो गई जो अडानी समूह के सीमेंट कारोबार के लिए तगड़ी चुनौती पेश करता है.
10 साल पहले हुआ था सौदा
अल्ट्राटेक सीमेंट और जेपी समूह में विवाद साल 2016 में शुरू हुआ था, जब दोनों ने एक बड़ी अधिग्रहण डील की थी. इसे सीमेंट सेक्टर की सबसे बड़ी डील माना जाता है. डील के तहत अल्ट्राटेक ने यूपी की डल्ला सुपर सीमेंट और उसकी खानों को खरीदने के लिए सौदा किया था. जेपी समूह पर भारी कर्ज लदने के बाद उसने अपना सीमेंट बिजनेस अल्ट्राटेक को बेच दिया था. डील में यूपी, हिमाचल, उत्तराखंड, एमपी और आंध्र प्रदेश में स्थित कंपनी के 6 प्लांट और 5 ग्राइंड यूनिट को बेचा था. इसकी कुल वैल्यू 16,189 करोड़ रुपये थी. एनसीएलटी की मुंबई और इलाहाबाद बेंच की मंजूरी के बाद 29 जून, 2017 से यह डील प्रभावी हो गई थी.
किस बात पर शुरू हुआ विवाद
डील तो पूरी हो गई लेकिन एक पेच फंस गया, जिसे लेकर अभी तक विवाद चल रहा था. दरअसल, डल्ला सुपर यूनिट और उसकी खानों के लिए अल्ट्राटेक ने जेएएल को 1 लाख तरजीही शेयर जारी किए थे, जिसकी कुल कीमत 1 हजार करोड़ रुपये थी. इन शेयर्स को एस्क्रो अकाउंट में रखा गया था और कुछ शर्तें पूरी होने पर इसे रिडीम किया जा सकता था. यह शर्त खासतौर से यूनिट और खानों के रेगुलेटरी अप्रूवल से जुड़ी थी. अल्ट्राटेक ने कुल अप्रूवल पेंडिंग की वजह से इसका रिडेम्पशन टाल दिया था. जेएएल ने इसे देरी माना और शर्तें पूरी होने का दावा किया. इसके बाद से ही विवाद चल रहा था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





