असम में बीजेपी की UCC और लव-लैंड जिहाद वाला दांव, क्या कांग्रेस की 5 गारंटियों को नेस्तनाबूत कर देगा? जानें दोनों में अंतर

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असम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के बाद बीजेपी ने भी अपना संकल्प पत्र मंगलवार को जारी कर दिया है. राज्य की सियासत में ‘घोषणापत्रों का महायुद्ध’ शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी ने जहां अपने ‘संकल्प पत्र’ के जरिए हिंदुत्व, पहचान और सुरक्षा के मुद्दों पर फोकस किया है, वहीं कांग्रेस ने अपनी ‘5 गारंटियों’ के जरिए लोकलुभावन वादों की झड़ी लगा दी है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह चुनाव केवल विकास का नहीं, बल्कि असम की सभ्यता और संस्कृति को बचाने का ‘धर्मयुद्ध’ है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस बार के असम चुनाव में मतदान से पहले कौन किस पर भारी नजर आ रहा है? कौन होगा इस बार के चुनाव का ‘महायोद्धा’?

बीजेपी के संकल्प पत्र में सबसे चौंकाने वाला और बड़ा ऐलान ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (UCC) को लेकर है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने वादा किया है कि सत्ता में वापसी के साथ ही असम में UCC लागू किया जाएगा, हालांकि इसमें जनजातीय समुदायों और छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को बाहर रखा गया है. इसके अलावा, बीजेपी ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून बनाने का संकल्प लिया है. पार्टी का कहना है कि सत्रों और नामघरों की जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा, जिसे उन्होंने ‘लैंड जिहाद’ का नाम दिया है. यह मुद्दा असम के स्वदेशी यानी स्थानीय भूमिपुत्रों लोगों के बीच बीजेपी की पकड़ मजबूत करने के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है.

दूसरी तरफ, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और गौरव गोगोई के नेतृत्व में पार्टी ने ‘न्याय’ का कार्ड खेला है. कांग्रेस ने 5 मुख्य गारंटियां दी हैं. पहला- महिलाओं को बिना किसी शर्त के हर महीने निश्चित नकद राशि, दूसरा- हर परिवार को 25 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, तीसरा- 10 लाख स्वदेशी लोगों को जमीन का स्थायी पट्टा, चौथा- बुजुर्गों को 1,250 रुपये प्रति माह पेंशन, पांचवां- लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की मृत्यु के मामले में 100 दिनों के भीतर न्याय.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में जारी हुआ असम विधानसभा चुनाव का घोषणापत्र.

महिलाएं क्या असम चुनाव में निर्णायक साबित होंगी?

कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी की ‘अरुणोदय’ जैसी योजनाएं केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित हैं, जबकि उनकी गारंटी हर असमिया नागरिक के लिए बिना शर्त होगी. स्वास्थ्य बीमा का दांव राजस्थान और कर्नाटक की तर्ज पर खेला गया है, जिससे कांग्रेस मध्यम और गरीब वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है.

महिला वोट बैंक पर कब्जा करने की होड़ में कौन आगे?

महिला वोटरों को लुभाने के लिए दोनों पार्टियों में जबरदस्त होड़ दिख रही है. बीजेपी ने अपनी प्रमुख ‘अरुणोदय’ योजना के तहत मिलने वाली राशि को 1,250 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का वादा किया है. साथ ही, 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जवाब में कांग्रेस ने महिलाओं को 50,000 रुपये की मदद देने का वादा किया है ताकि वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें.

दोनों पार्टियों के वादों की असली हकीकत

असम की सबसे बड़ी समस्या ‘बाढ़’ को लेकर बीजेपी ने ‘बाढ़ मुक्त असम मिशन’ के तहत 18,000 करोड़ रुपये खर्च करने का संकल्प लिया है. रोजगार के मोर्चे पर बीजेपी ने 2 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया है. वहीं, कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार और पेपर लीक के आरोप लगाते हुए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का भरोसा दिलाया है.

असम में बीजेपी ने कांग्रेस को क्या चौकाया?

असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होना है. जहां बीजेपी UCC और ‘लैंड जिहाद’ के जरिए ध्रुवीकरण और स्वदेशी अस्मिता की राजनीति कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी गारंटियों के जरिए आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी को मुद्दा बना रही है. अब यह तो 4 मई को ही साफ होगा कि असम की जनता हिमंता के ‘संकल्प’ पर भरोसा जताती है या कांग्रेस की ‘गारंटी’ पर.



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