आंखों में रोशनी नहीं, पैरों से विकलांग, 13 वर्षीय आयुष के हाथों में जादू ऐसा कि ढोलक की आवाज सुन थिरक जाएंगे

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मिर्जापुर के लच्छापट्टी गांव के रहने वाले संदीप शर्मा के पुत्र आयुष शर्मा दोनों आंखों में रोशनी नहीं है, पैर से भी दिव्यांग है. बच्चे के भविष्य को लेकर पिता चिंतित थे. हालांकि, बेटा के भविष्य को लेकर परेशान पिता की समस्या तब खत्म हो गई, जब बेटा पढ़ाई के साथ ही ढोलक वादन सिख गया. आयुष का मन ढोलक वादन में ऐसा लगा कि अब कार्यक्रमों में भी भाग ले रहे हैं. गुरु के द्वारा शिक्षा और संगीत मिलने के बाद ढोलक का जबरदस्त वादन करते हैं.

मिर्जापुर: दोनों आंखों में रोशनी नहीं है, पैरों से दिव्यांग है, लेकिन प्रतिभा ऐसी है जिसे देखकर आप वाह-वाह कहेंगे. 13 वर्षीय किशोर ढोलक पर अद्भुत प्रतिभा प्रदर्शित करता है. एक बार गाना की धुन सुनने के बाद पूरे राग और सुर के साथ ढोलक वादन करता है. अबतक कई कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर चुका है. यूपी के मिर्जापुर जिले जिले का रहने वाला 13 वर्षीय आयुष शर्मा उन लोगों के लिये प्रेरणा बने हैं, जो उम्मीद छोड़ चुके हैं. दिव्यांग विद्यालय से पढाई की. किशोर का मन पढ़ाई के साथ गायन में लगता है. अबतक कई कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर चुके हैं.

बचपन से ढोलक में लगता है मन

मिर्जापुर के लच्छापट्टी गांव के रहने वाले संदीप शर्मा के पुत्र आयुष शर्मा दोनों आंखों में रोशनी नहीं है. पैर से भी दिव्यांग है. बच्चे के भविष्य को लेकर पिता चिंतित थे. हालांकि, बेटा के भविष्य को लेकर परेशान पिता की समस्या तब खत्म हो गई, जब बेटा पढ़ाई के साथ ही ढोलक वादन सिख गया. आयुष का मन ढोलक वादन में ऐसा लगा कि अब कार्यक्रमों में भी भाग ले रहे हैं. गुरु के द्वारा शिक्षा और संगीत मिलने के बाद ढोलक का जबरदस्त वादन करते हैं. आयुष ने बताया कि बचपन से ही मेरा शौक था कि ढोलक बजाऊं और गीत गुनगुनाऊँ. पहले अपने मन में गुनगुना था. ढोलक की तरह बजाता रहा. इसकी बदौलत ही हम यहां तक पहुंचे हैं.

धुन पकड़कर करता हूं वादन-आर्यन

आयुष ने बताया कि गुरु से शिक्षा लेने के बाद अब निखार आ गया है. जिस गाने को सुना होगा. उसका धुन हारमोनियम में मिलते ही ढोलक बजता हूं. धुन पकड़कर ताल पर चलता हूं. हमारे मन में कभी ऐसा नहीं आया कि आगे क्या करूंगा. प्रतिदिन एक घंटे का समय निकालते हैं. क्योकि, कई ऐसे बच्चे हैं, जिनको हर व्यवस्था मिली है. हालांकि, हमें स्कूल छोड़कर यह करना पड़ रहा है. मैं अपने हुनर पर काम कर रहे हैं. ताकि, उस हुनर को कहीं दिखा सकू. पिता संदीप ने बताया कि हमें लगता था कि बेटा कैसे जीवन को जियेगा, लेकिन अब खुद बेटे ने मेहनत से और प्रतिभा से अपनी छोटी पहचान बना ली है. हमें बेहद खुशी है. हम चाहते है कि मेरा बेटा बहुत आगे जाए और खूब नाम कमाए.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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