आदिवासी समाज को नक्सलवाद की तरफ किसने धकेला? अमित शाह का इंदिरा गांधी पर सीधा अटैक

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आदिवासी समाज को माओवाद की तरफ किसने धकेला? अमित शाह का इंदिरा पर सीधा अटैक

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अमित शाह ने नक्सलवाद की असली वजह का बहुत बड़ा खुलासा किया. अमित शाह ने कहा, ‘नक्सलवाद की असली वजह विकास की मांग नहीं है’. यह सिर्फ एक खतरनाक विचारधारा है. इंदिरा गांधी ने 1970 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए इसे अपनाया था. इसी वामपंथी सोच की वजह से देश में नक्सलवाद तेजी से फैला.

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अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है.

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि शासन की विफलताओं ने आदिवासी समाज को माओवादी विचारधारा की ओर धकेल दिया. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों तक सरकार को पहुंचना चाहिए था, वहां वर्षों तक उपेक्षा की गई, जिसका खामियाजा आज भी देश भुगत रहा है. अमित शाह ने सीधे तौर पर कांग्रेस की नीतियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा की अनदेखी ने हालात को और बिगाड़ा. उनके मुताबिक, आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने के बजाय उन्हें हालात के भरोसे छोड़ दिया गया, जिससे माओवाद को पनपने का मौका मिला.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “नक्सलवाद की असली वजह विकास की मांग नहीं है. यह एक विचारधारा है जिसे इंदिरा गांधी ने 1970 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए अपनाया था. इसी वामपंथी विचारधारा की वजह से नक्सलवाद फैला.” जब यह उग्रवाद अपने चरम पर था, तब इसकी व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र सहित लगभग एक दर्जन राज्य कभी इससे प्रभावित थे, और इन राज्यों को मिलाकर ही ‘रेड कॉरिडोर’ कहा जाने लगा. उन्होंने कहा, “वहां कानून का राज खत्म हो गया था. करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे, और हजारों युवाओं की जान चली गई.”

उन्होंने आगे कहा कि इस हिंसा की मानवीय कीमत बहुत भारी थी; अनुमानों के मुताबिक, इस संघर्ष के कारण पिछले कुछ वर्षों में लगभग 20,000 युवाओं ने अपनी जान गंवाई. शाह ने इस उग्रवाद की तीव्रता की ओर भी इशारा किया, और बताया कि नक्सली गुटों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षा बलों पर किए गए हमलों से ही हासिल किया जाता था. उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लगभग 92 प्रतिशत हथियार पुलिस बलों से ही लूटे गए थे.

गृह मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में वामपंथी उग्रवाद से निपटने के दौरान देश को कितनी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है; बेहतर शासन-प्रशासन, विकास से जुड़ी पहलें और सुरक्षा अभियानों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली गुटों का प्रभाव कम करने में सफलता मिली है.



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