इस प्रोजेक्ट से पीछे नहीं हटता भारत तो आज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नहीं पड़ती जरूरत, नहीं रुकती गैस सप्लाई

Date:


होमताजा खबरदेश

इस प्रोजेक्ट से पीछे नहीं हटता भारत तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नहीं पड़ती जरूरत

Last Updated:

Strait Of Hormuz And Iran-Pakistan-India Gas Pipeline Project: ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट पैदा हो गया है. इस कारण पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई बाधित हुई है. ऐसे में एक सवाल है कि अगर भारत ईरान के साथ प्रस्तावित गैस पाइप से नहीं हटता तो आज तस्वीर कुछ अलग होती. लेकिन, इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई व्यवहारिक बाधाएं थीं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

Zoom

2000 के आसपास ईरान-पाकिस्तान और भारत के बीच एक गैस पाइप लाइन बिछाने को लेकर बातचीत चल रही थी. अगर यह प्रोजेक्ट चलता तो आज तस्वीर कुछ और होती.

Strait Of Hormuz And Iran-Pakistan-India Gas Pipeline Project: ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग ने पूरी दुनिया को तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को करीब-करीब बंद कर दिया है. इस कारण दुनिया की तेल सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ा है. खतरे की आशंका में तेल टैंकर समंदर में अटके पड़े हैं. बीमा दरें आसमान छू रही हैं और तेल की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं. भारत जैसे देशों की तेल और गैस सप्लाई पर भी असर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत ही नहीं पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ने लगा है. हर जगह महंगाई की मार दिखने लगी है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव में ईरान ने इस स्ट्रेट को आंशिक रूप से खोला है. इससे कुछ भारतीय जहाज भी पार कर भारत पहुंचे हैं. लेकिन, यह अस्थायी राहत है. खैर आज हम मौजूदा समस्या की नहीं बल्कि एक पुराने प्रोजेक्ट की बात कर रहे हैं. ईरान और भारत के इस संयुक्त प्रोजेक्ट पर अगर काम किया गया होता और भारत इससे पीछे नहीं हटता तो संभवतः आज भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.

हम बात कर रहे हैं करीब 25 साल पहले प्रस्तावित ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस और तेल पाइप लाइन प्रोजेक्ट की. इस प्रोजेक्ट से भारत 2009-2010 के आसपास बाहर हो गया. यह एक 2775 किमी लंबा प्रोजेक्ट था, जो ईरान के दक्षिण पार्स गैस फील्ड से गैस सीधे भारत पहुंचाने वाला था. इस प्रोजेक्ट में 75 करोड़ क्यूबि फीट गैस पाकिस्तान को मिलना था. बाकी गैस भारत आना था. इस गैस पाइप लाइन का व्यास 56 इंच था. इस प्रोजेक्ट पर कुल अनुमानित लागत सात से साढ़े सात अरब डॉलर आने वाला था. ईरान अपने क्षेत्र में बनने वाले करीब 1100 किमी के प्रोजेक्ट को काफी पहले ही पूरा कर चुका है. भारत ने वर्ष 2009 ने इस प्रोजेक्ट से खुद को अलग कर लिया. अब यह प्रोजेक्ट केवल पाकिस्तान तक गया है.

भारत ने क्यों खींचे हाथ

पाकिस्तान के साथ रिश्ते को देखते हुए इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ना भारत के लिए आसान नहीं था. इसके साथ ही कई अन्य कारण भी थी. इसमें सबसे पहला कारण था- अमेरिकी दबाव. दरअसल, ईरान के कथित परमाणु कार्यक्रम चलाने की वजह से उसके खिलाफ कई अहम प्रतिबंध लगाए गए थे. अगर यह प्रोजेक्ट सफल हो जाता तो ईरानी को भारी मुनाफा होता. यह बात किसी भी कीमत पर अमेरिका को बर्दाश्त नहीं थी. इसलिए उसने इस प्रोजेक्ट के भागीदारों पर भारी दबाव बनाया. ठीक उसी दौर में भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर डील हो रही थी. कई जानकार मानते हैं कि इस न्यूक्लियर डील की लालच में भारत की तत्कालीन सरकार ने इस गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से अपने आप को बाहर कर लिया.

सुरक्षा को लेकर खतरा

इस प्रोजेक्ट से भारत के अलग होने के पीछे एक दूसरा कारण सुरक्षा था. इस पाइपलाइन का 1000 किमी से अधिक लंबा हिस्सा पाकिस्तान से गुजरना था. इसका भी एक बड़ा हिस्सा अशांत बलूचिस्तान से गुजरने वाला था. इस बीच 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले ने भारत की सुरक्षा चिंता को और गहरा कर दिया. इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहद खराब हो गए. ऐसे में पाकिस्तान की जमीन पर इस प्रोजेक्ट पर अरबों रुपये का निवेश करना भारत के लिए आत्मघाती लग रहा था.

कीमत और व्यावसायिक शर्तों पर मतभेद

इस प्रोजेक्ट से पीछे हटने के पीछे तीसरा अहम कारण कीमत और व्यावसायिक शर्तों पर मतभेद था. इस कारण भारत इस प्रोजेक्ट से हट गया और वह दूसरे विकल्पों पर काम करने लगा. भारत ने तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत पाइप लाइन की संभावना भी तलाशी लेकिन, इस प्रोजेक्ट को भी अमली जामा नहीं पहनाया जा सका. इसके पीछे भी पाकिस्तान की जमीन पर पाइप लाइन की सुरक्षा ही सबसे अहम मुद्दा है. भारत के रणनीतिकार यह मानते हैं कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों को देखते हुए यह आशंका जायज है कि अगर पाइपलाइन प्रोजेक्ट चालू होता है तो भविष्य में पाकिस्तान इस अपने क्षेत्र में ब्लॉक कर भारत में ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है.

लेकिन, पाकिस्तान से संबंध ठीक होता. वह आतंकवाद को प्रश्रय नहीं देता. वह भारत के हितों पर वार नहीं करता तो यह संभव होता कि तीनों देशों के बीच यह पाइपलाइन बन जाती. इससे तीनों को बड़ा फायदा होता. भारत और अन्य देशों को तेल और गैस की सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. लैंड बेस्ट पाइपलाइन समुद्री रास्ते की सारी कमजोरियां, जैसे ब्लॉकेड, ड्रोन हमले, माइन्स, बीमा की भारी लागत से बचाती. गैस की आपूर्ति निरंतर और सुरक्षित बनी रहती. ईरान भी अपना एक्सपोर्ट डायवर्सिफाई कर पाता. भारत के तेल और गैस के गोदाम आज लबालब भरे होते. कीमतें स्थिर रहतीं. विदेशी मुद्रा का प्रवाह भी कंट्रोल होता.

About the Author

authorimg

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related