ईरान जंग के बीच पाकिस्‍तान में हाहाकार, पेट्रोल-डीजल नहीं, इसकी कमी से तड़पेगा दलाल देश – indus water treaty acute water crisis in Pakistan

Date:


होमताजा खबरदेश

ईरान जंग के बीच पाकिस्‍तान में हाहाकार, पेट्रोल नहीं, इसकी कमी से मचेगा कोहराम

Last Updated:

Pakistan Water Crisis: पहल‍गाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते से पीछे हटते हुए इसे ठंडे बस्‍ते में डालने का ऐलान किया था. सिंधु नदी तंत्र पाकिस्‍तान के लिए जीवनरेखा है. यदि इस सिस्‍टम में पानी का प्रवाह कम या ज्‍यादा होता है तो इसका सीधा असर पड़ोसी देश पर पड़ता है. इससे लाखों-करोड़ों लोग सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं. अब अल-नीनो के चलते इस बार बारिश में कमी की आशंका बनी हुई है, ऐसे में पाक‍िस्‍तान के लिए इन चुनौतियों से निपटना आसान नहीं होगा.

Zoom

मौसम विज्ञानियों ने इस बार अल-नीनो के सक्रिय होने की चेतावनी दी है. इसका मतलब यह हुआ कि इस बार औसत से कम बारिश होने की पूरी आशंका है. ऐसे में इस बार पाकिस्‍तान में इस बार जल संकट गहरा सकता है, क्‍योंकि सिंधु जल समझौता को भारत पहले ही ठंडे बस्‍ते में डाल चुका है. (फाइल फोटो/Reuters PTI)

Pakistan Water Crisis: भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को रद्द करने और पाकिस्तान के हिस्से की नदियों का पानी रोकने के फैसले ने दक्षिण एशिया में जल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. इस कदम का असर ऐसे समय में सामने आ रहा है जब अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियां पहले ही अल नीनो के कारण कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति की आशंका जता चुकी हैं. ऐसे में पाकिस्तान के लिए हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. पाकिस्‍तान की अधिकांश जनता को अपने सरकार की काली करतूतों का खामियाजा गंभीर जल संकट के तौर पर भुगतना पड़ सकता है. दूसरी तरफ, कम बारिश होने के बावजूद भारत के पास सरप्‍लस वॉटर रहने की संभावना है, जिसका इस्‍तेमाल खेतीबारी के साथ ही पेयजल के लिए भी किया जा सकेगा.

सिंधु जल समझौता (जो 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था) दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रहा है. इस समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का उपयोग करने का अधिकार था, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिलता रहा है. लेकिन अब भारत द्वारा समझौते को खत्म करने और पानी रोकने के संकेत से पाकिस्तान की कृषि और पेयजल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है. पहलगाम में बर्बर आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्‍ते में डालने का ऐलान किया था.

पाकिस्‍तान में त्राहिमाम मचना तय

एक्‍सपर्ट का मानना है कि पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत खेती सिंधु नदी प्रणाली (Indus River System) पर निर्भर है. पाकिस्‍तान का पंजाब और सिंध प्रांत (जो देश के प्रमुख कृषि क्षेत्र हैं) इन नदियों के जल पर पूरी तरह टिके हुए हैं. यदि पानी की आपूर्ति बाधित होती है, तो गेहूं, चावल और कपास जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. स्थिति को और गंभीर बनाने वाला कारक है अल नीनो. अंतरराष्ट्रीय मौसम विभागों ने चेतावनी दी है कि इस साल अल नीनो प्रभाव के चलते दक्षिण एशिया में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. इसका मतलब है कि न केवल नदियों में पानी का प्रवाह घटेगा, बल्कि भूजल स्तर भी तेजी से नीचे जा सकता है. पाकिस्तान जैसे देश (जहां पहले से ही जल प्रबंधन की समस्याएं हैं) वहां यह स्थिति आपातकाल का रूप ले सकती है.

हालात पहले से ही हैं खराब

पाकिस्तान पहले ही जल संकट से जूझ रहा है. विश्व संसाधन संस्थान (WRI) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के सबसे अधिक जल-संकटग्रस्त देशों में शामिल है. प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार घट रही है और कई शहरों में पेयजल की कमी आम बात हो गई है. ऐसे में यदि भारत द्वारा पानी रोके जाने की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह संकट और गहरा सकता है. राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं. पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश कर सकता है, जबकि भारत इसे अपने आंतरिक अधिकार और सुरक्षा से जुड़ा कदम बता सकता है. इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

कुदरत की मार

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नदियों के पूरे प्रवाह को रोक पाना तकनीकी रूप से आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए बड़े स्तर पर बांध और जल भंडारण ढांचे की आवश्यकता होती है. फिर भी पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने या समय-समय पर रोकने जैसे कदम भी पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं. सिंधु जल समझौते का रद्द होना और अल नीनो का प्रभाव ये दोनों मिलकर पाकिस्तान के लिए जल संकट की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं. आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस संवेदनशील मुद्दे को कैसे संभालते हैं और क्या कोई कूटनीतिक समाधान निकल पाता है या नहीं.

About the Author

authorimg

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related