ईरान जंग के बीच भारत ने किया बड़ा काम, मुंह ताकते रह गई दुनिया – BrahMos Aerospace delivered 8 Manik Small Turbofan Engines To DRDO

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Indigenous Cruise Missile Technology: भारत डिफेंस सेक्‍टर में लगातार आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. फाइटर जेट से लेकर एयर डिफेंस सिस्‍टम, आर्टिलरी, तोप-टैंक आदि के क्षेत्र में भारत लगातार प्रगति कर रहा है. मिसाइल के क्षेत्र में देसी टेक्‍नोलॉजी के दम पर लंबी छलांग लगाई गई है. ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अग्नि सीरीज इसकी मिसाल है. कुछ सप्‍ताह पहले ही भारत ने सबमरीन से लॉन्‍च होने वाली लंबी दूरी की मिसाइल की सफल लॉन्चिंग की थी. इसके अलावा प्रलय सीरीज की मिसाइलों ने सुरक्षाबलों को नई ताकत दी है. अब देसी मिसाइल टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम को एक बड़ी कामयाबी मिली है. लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के लिए विकसित किए जा रहे स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए BrahMos Aerospace की इकाई BrahMos Aerospace Thiruvananthapuram Limited (BATL) ने माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन (STFE) की पहली खेप सफलतापूर्वक सौंप दी है. यह डिलीवरी Gas Turbine Research Establishment (GTRE) को की गई है, जो इन इंजनों के ट्रायल और सर्टिफिकेशन के लिए जिम्मेदार है.

रिपोर्ट के मुताबिक, BATL ने कुल 25 इंजनों के ऑर्डर में से अब तक 8 माणिक इंजन GTRE को सौंप दिए हैं. यह उपलब्धि भारत के इंडिजिनस टेक्नोलॉजी क्रूज मिसाइल (ITCM) कार्यक्रम के तहत प्रोपल्शन सिस्टम के पूर्ण स्वदेशीकरण की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है. माणिक इंजन के विकसित होने से भारत को अब विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे उसकी सामरिक स्वायत्तता और मजबूती बढ़ेगी. अब तक भारत अपनी ‘निर्भय’ क्रूज मिसाइल के लिए रूस के NPO Saturn 36MT इंजन पर निर्भर था, लेकिन माणिक इंजन के आने से यह निर्भरता खत्म हो रही है और देश पूरी तरह स्वदेशी समाधान की ओर बढ़ रहा है. यह बदलाव न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि भविष्य के रक्षा कार्यक्रमों के लिए भी मजबूत आधार तैयार करता है.

यह है फ्यूचर प्‍लानिंग

GTRE ने शुरुआती चरण में इन इंजनों को किट के रूप में प्राप्त किया था, जिन्हें बाद में असेंबल किया जाता था, लेकिन अब संस्थान ने BATL से अनुरोध किया है कि दसवें इंजन से आगे पूरी तरह असेंबल्ड इंजन ही सप्लाई किए जाएं. इस फैसले से GTRE में लगने वाला असेंबली समय कम होगा और इंजीनियर सीधे परीक्षण, वैलिडेशन और सर्टिफिकेशन पर ध्यान दे सकेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम BATL की निर्माण गुणवत्ता और प्रक्रिया पर बढ़ते भरोसे को भी दर्शाता है. माणिक इंजन तकनीकी रूप से एक ट्विन-स्पूल, अन-रीहीटेड टर्बोफैन इंजन है, जो 4.25 से 4.50 किलो न्यूटन तक का थ्रस्ट उत्पन्न करने में सक्षम है. इसका वजन लगभग 100 किलोग्राम है, जो इसे लंबी दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए बेहद उपयुक्त बनाता है. इसमें स्वदेशी फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) सिस्टम लगाया गया है, जो ईंधन आपूर्ति, थ्रस्ट कंट्रोल और इंजन की सेहत की निगरानी को अत्यंत सटीक बनाता है.

माणिक इंजन प्रोग्राम से बदलेगी तस्‍वीर

  • BrahMos Aerospace की इकाई ब्रह्मोस एयरोस्पेस तिरुवनंतपुरम लिमिटेड (BATL) ने 25 इंजनों के ऑर्डर में से 8 माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन (STFE) Gas Turbine Research Establishment (GTRE) को सौंपे हैं.
  • यह उपलब्धि इंडिजिनस टेक्नोलॉजी क्रूज़ मिसाइल (ITCM) प्रोग्राम के तहत लंबी दूरी की मिसाइलों के लिए स्वदेशी इंजन विकसित करने की दिशा में अहम कदम है.
  • माणिक इंजन ने पहले इस्तेमाल हो रहे रूसी NPO Saturn 36MT इंजन की जगह ली है, जिससे भारत की विदेशी निर्भरता कम हुई है.
  • BATL अब इस इंजन का प्रमुख निर्माता बन गया है, जिससे भारत को मिसाइल तकनीक में रणनीतिक आत्मनिर्भरता मिली है.
  • GTRE ने निर्देश दिया है कि 10वें इंजन से आगे सभी इंजन पूरी तरह असेंबल्ड स्थिति में सप्लाई किए जाएं.
    इस बदलाव से GTRE में असेंबली का समय बचेगा और वैज्ञानिक सीधे परीक्षण, वैलिडेशन और सर्टिफिकेशन पर ध्यान दे सकेंगे.
  • BATL की उत्पादन क्षमता फिलहाल करीब 12 इंजन प्रति वर्ष है, जो इस तरह के जटिल टर्बोफैन इंजनों के निर्माण को दर्शाता है.
  • माणिक इंजन एक ट्विन-स्पूल, बिना रीहीट वाला टर्बोफैन है, जो 4.25–4.50 किलो न्यूटन थ्रस्ट देने में सक्षम है.
    लगभग 100 किलोग्राम वजनी इस इंजन में स्वदेशी FADEC (Full Authority Digital Engine Control) सिस्टम लगा है, जो फ्यूल कंट्रोल और इंजन मॉनिटरिंग को बेहतर बनाता है.
  • इसमें मिड-एयर स्टार्ट की पायरोटेक्निक क्षमता भी है, जो मिसाइल लॉन्च के बाद इंजन को हवा में चालू करने में मदद करती है.
  • GTRE और BATL के बीच करीबी सहयोग से इस इंजन को उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर तैयार किया गया है.
  • केरल सरकार ने तिरुवनंतपुरम के नेट्टुकलथेरी में BATL के विस्तार के लिए 180 एकड़ जमीन आवंटित की है.
  • इस विस्तार से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और भविष्य की मिसाइल परियोजनाओं को भी समर्थन मिलेगा.
स्‍वदेशी लॉन्‍ग रेंज क्रूज मिसाइल टेक्‍नोलॉजी प्रोपल्‍सन सिस्‍टम के क्षेत्र में भारत आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है. (फाइल फोटो/Reuters)

गजब की है खासियत

इस इंजन की एक खास विशेषता इसकी ‘पाइरोटेक्निक मिड-एयर स्टार्ट’ क्षमता है. इसका मतलब है कि मिसाइल लॉन्च होने के बाद हवा में ही इंजन को विश्वसनीय तरीके से शुरू किया जा सकता है. यह फीचर युद्ध के दौरान क्रूज मिसाइलों के ऑपरेशन में बेहद अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि इससे मिशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है. इस पूरे प्रोजेक्ट की सफलता में GTRE और BATL के बीच करीबी तालमेल की अहम भूमिका रही है. जहां GTRE ने डिजाइन, परीक्षण और प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी निभाई, वहीं BATL ने उत्पादन और निर्माण का नेतृत्व किया. इस साझेदारी ने यह सुनिश्चित किया कि इंजन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रदर्शन और विश्वसनीयता प्रदान करे.

हर साल 12 इंजन का प्रोडक्‍शन

उत्पादन क्षमता की बात करें तो BATL फिलहाल प्रति वर्ष लगभग 12 इंजनों का उत्‍पादन कर रही है. छोटे आकार के टर्बोफैन इंजन बनाने में हाई-लेवल प्रिसीजन की जटिलता होती है, जिसके चलते उत्पादन दर को नियंत्रित रखा गया है. हालांकि, आने वाले समय में इसमें तेजी देखने को मिल सकती है. इसी दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केरल सरकार ने तिरुवनंतपुरम के पास नेट्टुकलथेरी में BATL के विस्तार के लिए 180 एकड़ भूमि आवंटित की है. इस नए प्लांट के स्थापित होने से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भविष्य की मिसाइल परियोजनाओं को भी गति मिलेगी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि माणिक इंजन का सफल विकास भारत के मिसाइल कार्यक्रम के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. यह न केवल स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूती देगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक आत्मनिर्भर और उन्नत रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.



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