ईरान जंग के बीच रूस फिर बना भारत का मददगार, सीना तानकर उड़ेंगे Su-30, चीन-पाकिस्तान की बंध जाएगी घिग्घी

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अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की लंबी खिंचती जंग के बीच भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इस कड़ी भारत के भरोसेमंद साथी रूस ने एक बार फिर बड़ी मदद दी है. उसने भारत को 12 नए Su-30MKI लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए किट्स सप्लाई करने का फैसला किया है. ये किट्स हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक प्लांट में असेंबल किए जाएंगे और भारतीय वायुसेना (IAF) को इस साल के अंत तक सौंप दिए जाएंगे. इस फैसले को सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी और रूस के साथ गहरे भरोसे का संकेत माना जा रहा है.

वायुसेना की बड़ी टेंशन दूर

भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को एक और मजबूती मिली है. टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अब भारत को 12 Su-30MKI फाइटर जेट्स के निर्माण के लिए पूरी तरह से नॉक्ड-डाउन (CKD) किट्स उपलब्ध करा रहा है. करीब 13,500 करोड़ रुपये के इस समझौते के तहत 62 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री वाले ये विमान IAF की स्क्वाड्रन कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 270 Su-30MKI विमान सेवा में हैं, जो IAF की रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं. ये विमान लंबी दूरी की स्ट्राइक, एयर सुपीरियरिटी और ग्राउंड अटैक क्षमता के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं. HAL नासिक में इनकी लाइसेंस्ड प्रोडक्शन लाइन पहले से चल रही है. अब रूस से आए इन किट्स की मदद से 12 और नए फाइटर जेट तैयार किए जाएंगे.

इस किट में टाइटेनियम ब्लॉक्स, फोर्जिंग्स, एल्युमिनियम और स्टील प्लेट्स समेत हजारों कंपोनेंट्स शामिल हैं. इनके जरिए एचएएल नई Su-30MKI असेंबल करेगा, जिसमें भारतीय एवियोनिक्स, रडार और स्वदेशी हथियार जैसे अस्त्र मिसाइल को बेहतर तरीके से इंटीग्रेट किया जाएगा.

क्या खास है Su-30MKI में?

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2024 में साइन हुए इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत विमानों की डिलीवरी 2026 के अंत तक पूरी हो जाएगी. यह कदम भारतीय वायुसेना की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है, क्योंकि तेजस Mk1A जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों में देरी हो रही है और राफेल की अतिरिक्त स्क्वाड्रन अभी दूर की कौड़ी हैं. वर्तमान में वायुसेना के पास राफेल के केवल दो स्क्वाड्रन एक्टिव हैं. ऐसे में ये 12 अतिरिक्त Su-30MKI स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ को तुरंत बढ़ाएंगे और ऑपरेशनल रेडीनेस को मजबूत करेंगे.

Su-30MKI का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म निरंतर अपग्रेड के लिए उपयुक्त है. IAF पहले से ही इन विमानों को आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर रडार और स्वदेशी हथियारों से लैस कर रहा है. नई किट्स से बने विमान और भी घातक होंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि ये विमान लंबी दूरी तक दुश्मन के एयर डिफेंस को भेदने, समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने और हवा में लड़ाई में श्रेष्ठता हासिल करने में सक्षम हैं.

चीन और पाकिस्तान की कैसे बंधेगी घिग्घी?

भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर चीन और पाकिस्तान की संयुक्त चुनौती को देखते हुए Su-30MKI फ्लीट का विस्तार दोनों पड़ोसियों के लिए चिंता का विषय है. चीन अपनी J-20 स्टेल्थ फाइटर और पाकिस्तान अपनी JF-17 और J-10C फ्लीट को मजबूत कर रहा है, लेकिन Su-30MKI की संख्या, पेलोड क्षमता और रेंज अभी भी क्षेत्र में सबसे मजबूत बनी हुई है. ये नए विमान ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को कैरी करने में सक्षम होंगे, जो चीन के सैन्य अड्डों और पाकिस्तान की सामरिक संपत्तियों के लिए गंभीर खतरा है.

विश्लेषकों का अनुमान है कि इन 12 विमानों के शामिल होने से IAF की स्ट्राइक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे चीन-पाकिस्तान गठजोड़ की कोई भी आक्रामक योजना पहले से ही प्रभावित होगी. दोनों देशों की “घिग्घी बंधनी” तय मानी जा रही है क्योंकि भारत अब और तेज गति से अपनी हवाई श्रेष्ठता बढ़ा रहा है.

नासिक में बनेंगे लड़ाकू विमान

यह डील आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की भावना को मजबूत करती है. नए विमानों में 62.6 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी, जिसमें भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित कई कंपोनेंट्स शामिल हैं. एचएएल नासिक प्लांट में असेंबली के दौरान भारतीय इंजीनियरों और टेक्नीशियंस को और बेहतर अनुभव मिलेगा. भविष्य में Su-30MKI के और अपग्रेड या यहां तक कि Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर के प्रोडक्शन के लिए यह लाइन तैयार रहेगी.

रूस ने न केवल किट्स सप्लाई किए हैं, बल्कि Su-30MKI के बड़े पैमाने पर अपग्रेड के लिए भी चर्चा चल रही है. IAF की करीब 175 विमानों को अपग्रेड करने की योजना पर रूसी विशेषज्ञ HAL सुविधाओं का दौरा कर चुके हैं. इससे पुरानी फ्लीट को नई जान मिलेगी और लागत भी नियंत्रण में रहेगी.

एस-400, ब्रह्मोस और अब Su-30MKI…

वर्तमान समय में जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, भारत-रूस रक्षा साझेदारी एक स्थिर स्तंभ साबित हो रही है. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी, BrahMos मिसाइल प्रोजेक्ट और अब Su-30MKI किट्स… ये सभी कदम दिखाते हैं कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक हितों का सम्मान करते हैं. IAF के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, ये 12 विमान स्क्वाड्रन की कमी को तुरंत भरेंगे और जब तक बड़े पैमाने पर स्वदेशी या अतिरिक्त Rafale विमान नहीं आ जाते, तब तक Su-30MKI फ्लीट ही मुख्य बल बनी रहेगी. इन विमानों की मल्टी-रोल क्षमता भारत को हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक हर मोर्चे पर मजबूती देगी.

ईरान युद्ध की आग के बीच रूस का यह सहयोग भारत के लिए समय पर मिली राहत है. Su-30MKI जैसे दिग्गज फाइटर अब और अधिक संख्या में सीना तानकर उड़ेंगे, जिससे दुश्मनों की नींद उड़नी तय है. चीन और पाकिस्तान को अब भारत की बढ़ती हवाई शक्ति का सामना करने के लिए नई रणनीति सोचनी पड़ेगी. यह डील सिर्फ 12 विमानों की नहीं, बल्कि भारत की रक्षा स्वावलंबन और मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की कहानी है. HAL नासिक में असेंबली शुरू होते ही आकाश में भारत की ताकत और मजबूत होगी. रूस ने एक बार फिर साबित किया कि वह कठिन समय में भी भारत का विश्वसनीय मददगार बना रहता है.



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