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RBI New Target : तेल आयात पर बढ़े जोखिम और एलपीजी सप्लाई में आई रही बाधाओं के बीच रिजर्व बैंक को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. सरकार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि आरबीआई को अगले 5 साल यानी 2031 तक खुदरा महंगाई के आंकड़े को 4 फीसदी के आसपास ही रखना होगा. इसमें 2 फीसदी की बढ़त या गिरावट की गुंजाइश हो सकती है.
सरकार ने एक बार फिर आरबीआई को खुदरा महंगाई का लक्ष्य सौंपा है.
नई दिल्ली. ईरान और इजराइल युद्ध ने जहां दुनियाभर में महंगाई का जोखिम बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है, वहीं भारतीय रिजर्व बैंक को इस मुश्किल घड़ी में एक बेहद चुनौती भरा काम सौंपा गया है. सरकार ने कहा है कि रिजर्व बैंक अगले 5 साल तक खुदरा महंगाई को 4 फीसदी के आसपास ही बनाए रखे. इसमें 2 फीसदी ऊपर या फिर नीचे जाने की गुंजाइश रहेगी, लेकिन इससे ज्यादा का बदलाव नहीं आना चाहिए. युद्ध की वजह से आयात और निर्यात पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए आरबीआई के लिए यह काम किसी पहाड़ चढ़ने जितना मुश्किल होने वाला है.
आर्थिक मामलों के विभाग की ओर से रिजर्व बैंक को जारी पत्र में कहा गया है कि आरबीआई के लिए खुदरा महंगाई के लक्ष्य को पहले की तरह ही बरकरार रखा गया है. इसके तहत रिजर्व बैंक को अगले पांच साल यानी मार्च, 2031 तक के लिए खुदरा महंगाई को दो फीसदी घटने या फिर बढ़त के साथ 4 फीसदी पर बनाये रखने को जिम्मेदारी फिर से दी गई है. इसका मतलब है कि न तो खुदरा महंगाई को 6 फीसदी से ऊपर जाने दिया जाएगा और न ही 2 फीसदी से नीचे, जबकि औसत खुदरा महंगाई 4 फीसदी के आसपास बनी रहनी चाहिए.
10 साल पहले तय किया था लक्ष्य
सरकार ने मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए साल 2016 में आरबीआई को 31 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाले पांच वर्षों के लिए खुदरा महंगाई को दो फीसदी घट-बढ़ के साथ 4 फीसदी पर बनाए रखने की जिम्मेदारी दी थी. इसके बाद, मार्च 2021 में, सरकार ने इसी लक्ष्य को बरकरार रखा था. यह दूसरी बार है जब सरकार ने महंगाई के लक्ष्य को फिर से उसी स्तर पर बरकरार रखा है.
महंगाई की ऊपरी और निचली सीमा निर्धारित
आर्थिक मामलों के विभाग की ओर से 25 मार्च को गजट में प्रकाशित अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक के परामर्श से, एक अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक की अवधि के लिए खुदरा महंगाई लक्ष्य को अधिसूचित करती है. अधिसूचना के अनुसार, महंगाई का लक्ष्य 4 फीसदी है. इसकी ऊपरी सीमा 6 फीसदी और निचली सीमा 2 फीसदी रखी गई है. भारत ने महंगाई लक्ष्य की रूपरेखा को अपनाया है और साल 2016 में केंद्रीय बैंक को औपचारिक रूप से इसकी जिम्मेदारी सौंपी.
10 साल में कितना पूरा हुआ लक्ष्य
रिजर्व बैंक की 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को अक्टूबर, 2016 में अपनी पहली बैठक में 31 मार्च, 2021 तक सालाना महंगाई को 2 फीसदी के घट-बढ़ के साथ 4 फीसदी पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली थी. पिछले एक दशक में आरबीआई इस महंगाई लक्ष्य को लगभग तीन-चौथाई समय तक निर्धारित सीमा के भीतर रखने में कामयाब रहा है. हालांकि, कोरोनाकाल में जरूर खुदरा महंगाई का आंकड़ा इस दायरे से बाहर चला गया था. ताजा आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.21 फीसदी हो गयी जो इससे पिछले महीने में 2.74 फीसदी थी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





