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खेती शुरू करने से पहले किसानों को अपनी जमीन की प्रकृति को समझना बेहद जरूरी है. अगर खेत कहीं ऊंचा-नीचा है, तो उसे समस्या मानने के बजाय अवसर के रूप में देखें. जहां पानी अधिक जमा होता है, वहां धान की खेती करें, जबकि ऊंचे हिस्से में भिंडी जैसी फसल लगाएं.
रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को खेती करते समय फसल संयोजन (Crop Combination) अपनाना चाहिए. यानी एक ही खेत में दो या अधिक फसलों को साथ लेकर चलना चाहिए. उदाहरण के तौर पर धान के साथ भिंडी की खेती की जा सकती है. कई बार एक ही खेत में ऊंची और नीची जमीन होती है. ऐसे में निचले हिस्से में धान और ऊपरी हिस्से में भिंडी की खेती कर किसान बेहतर उत्पादन ले सकते हैं. इस तरीके से खेत के हर हिस्से का सही उपयोग होता है और अतिरिक्त मुनाफा कमाने का मौका मिलता है.
इसे कहते हैं इंटरक्रॉपिंग फार्मिंग
कृषि वैज्ञानिक अमित के अनुसार, खेती शुरू करने से पहले किसानों को अपनी जमीन की प्रकृति को समझना बेहद जरूरी है. अगर खेत कहीं ऊंचा-नीचा है, तो उसे समस्या मानने के बजाय अवसर के रूप में देखें. जहां पानी अधिक जमा होता है, वहां धान की खेती करें, जबकि ऊंचे हिस्से में भिंडी जैसी फसल लगाएं. इस तरह की खेती को इंटरक्रॉपिंग कहा जाता है, जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार फसल उगाई जाती है.
एक ही खेत में दो फसल, कम लागत में अधिक मुनाफा
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि धान के साथ आलू की खेती भी की जा सकती है. धान को पतली क्यारियों में बोया जाए और उसके किनारे बने मेड़ों पर आलू लगाया जाए. इससे एक ही समय और एक ही चक्र में दोनों फसलें तैयार हो जाती हैं. ऐसी स्थिति में खाद, पानी और मेहनत भी लगभग समान रहती है, लेकिन उत्पादन दोगुना हो जाता है.
सरसों के साथ चना की खेती
इसके अलावा सरसों के साथ चना की खेती भी एक अच्छा विकल्प है. दोनों फसलों की परिपक्वता अवधि लगभग समान होती है और करीब तीन महीने में दोनों तैयार हो जाती हैं. इन फसलों को लगभग एक जैसे पानी और खाद की जरूरत होती है. ऐसे में किसान एक ही मेहनत में दो अलग-अलग फसलें प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि, इस तरह का संयोजन बनाते समय थोड़ी सावधानी बरतनी जरूरी है.
कंबिनेशन बनाते समय रखें ध्यान
कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि जब भी दो फसलों को साथ उगाएं, तो यह जरूर देखें कि दोनों की पानी और खाद की जरूरत लगभग समान हो. साथ ही, उनकी परिपक्वता अवधि भी एक जैसी होनी चाहिए, ताकि कटाई और देखभाल एक साथ की जा सके.
इंटरक्रॉपिंग से फायदे
इंटरक्रॉपिंग अपनाने से किसान कम जमीन में अधिक फसल उगा सकते हैं. इससे वे एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहते और जोखिम भी कम होता है. अलग-अलग फसलों के कारण बाजार में विकल्प बढ़ते हैं और मुनाफा भी बेहतर मिलता है. जैसे, सरसों से तेल निकाला जा सकता है, आलू की मांग सालभर रहती है और भिंडी एक सीजन में अच्छी आमदनी देती है. इस तरह की वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें




