बहराइच: एफपीओ (FPO) यानी किसान उत्पादक संगठन, जिसे फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन भी कहा जाता है. यह किसानों का एक स्वैच्छिक संगठन होता है, जो किसानों द्वारा और किसानों के लिए ही बनाया जाता है. यह सरकार की एक बेहद लाभकारी योजना है, जिसके माध्यम से किसान भाई खुद को सशक्त और समृद्ध बना सकते हैं.
एफपीओ से क्या-क्या फायदा
एफपीओ से किसानों को कई तरह के लाभ मिलते हैं. इसमें किसान भाइयों को सस्ते दर पर खाद, कृषि यंत्र और खेतों में उपयोग होने वाली कीटनाशक दवाएं उपलब्ध होती हैं. इसके अलावा, किसान यहां से प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं. संगठन के सदस्य किसानों के खेतों पर जाकर उनकी समस्याओं का समाधान भी करते हैं.
किसान भाई कैसे बना सकते हैं एफपीओ
एफपीओ बनाने के लिए सबसे पहले 10 से 12 किसानों की आवश्यकता होती है, जिसे बोर्ड ऑफ कमेटी भी कहा जाता है. इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल, खसरा-खतौनी और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जैसे दस्तावेजों के साथ कृषि विभाग में आवेदन करना होता है. कृषि विभाग की ओर से अधिकृत सीए (CA) तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं. सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान संगठन बनाकर अन्य किसानों को जोड़ते हुए एफपीओ स्थापित कर सकते हैं.
पहले से बने एफपीओ में ऐसे जुड़ सकते हैं किसान
किसान भाई पहले से बने एफपीओ में भी जुड़ सकते हैं. इसके लिए एक निर्धारित रजिस्ट्रेशन फीस होती है, जो 500 से 1000 रुपये के बीच हो सकती है. फीस जमा कर किसान एफपीओ के सदस्य बन जाते हैं. इसके बाद संगठन इन पैसों का उपयोग विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों में करता है, जिससे किसानों को लाभ मिलता है.
एफपीओ से जुड़कर किसान कर सकते हैं ये बिजनेस
एफपीओ से जुड़कर किसान कई तरह के व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, जैसे कि सरसों स्पेलर यूनिट लगाना, मोटा अनाज (श्री अन्न) जैसे रागी, सावा, मक्का और ज्वार का आटा बनाकर पैकिंग के साथ बाजार में बेचना. इसके अलावा, केला उत्पादक किसान केले के चिप्स बनाकर ब्रांडिंग के साथ मार्केट में उतार सकते हैं. इस तरह एफपीओ किसानों को न सिर्फ खेती में मदद करता है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर आय बढ़ाने के कई अवसर भी प्रदान करता है.


