कब है वैशाख की पहली एकादशी? इस दिन किया ये एक उपाय, किस्मत बदलने में नहीं लगेगी देर! जानिए शुभ मुहूर्त

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कब है वैशाख की पहली एकादशी? करें ये एक उपाय, किस्मत बदलने में नहीं लगेगी देर!

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first Ekadashi of Vaishakh: वैशाख महीने में आने वाली वरुथिनी एकादशी का हिंदू धर्म में खास महत्व माना जाता है. इन सभी एकादशियों का अपना-अपना महत्व होता है, लेकिन वरुथिनी एकादशी को विशेष फलदायी बताया गया है. इस दिन का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं.

देवघर. वैशाख महीने में आने वाली वरुथिनी एकादशी का हिंदू धर्म में खास महत्व माना जाता है. हर महीने दो एकादशी आती हैं. एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में. इन सभी एकादशियों का अपना-अपना महत्व होता है, लेकिन वरुथिनी एकादशी को विशेष फलदायी बताया गया है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से व्रत रखकर पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. कब है वरुथिनी एकादशी क्या कुछ खास महत्व है जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य से?

देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है. साल 2026 में यह व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा. शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन व्रत रखने से बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं.

पूजा का क्या है शुभ मुहूर्त
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की बात करें तो 13 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 58 मिनट से 07 बजकर 34 मिनट तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा. इसके बाद सुबह 09 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक शुभ-उत्तम मुहूर्त रहेगा. इन समयों में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है. व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहने और भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की पूजा करें. इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है, इसलिए अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को दान जरूर करें.

व्रत का कब करें पारण
व्रत का पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा.पारण का समय सुबह 06 बजकर 54 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. ध्यान रखें कि हरि वासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना चाहिए, जो इस दिन सुबह 06 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगा. कुल मिलाकर, वरुथिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करने पर जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और भगवान की कृपा बनी रहती है.

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Mohd Majid

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