कीमत ₹28,44,170, वजन 1401 KG, फैक्ट्री में बन रहा था तेजाब वाला नकली पनीर, सकते में प्रशासन

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गुजरात के सूरत में सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. पांडेसरा इलाके की ‘भीडभंजन सोसाइटी’ में पिछले दो साल से चल रही एक अवैध पनीर फैक्ट्री पर एसओजी और खाद्य विभाग ने छापा मारा. प्रशासन ने करीब 1401 किलो नकली पनीर और भारी मात्रा में केमिकल जब्त किए हैं. यह पनीर सूरत के नामी होटलों और ढाबों में सप्लाई किया जा रहा था, जिससे हज़ारों लोगों की किडनी और लीवर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.

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नकली पीनर का भंडार मिला, जो तेजाब से बनाया जा रहा था.

सूरत: प्रोटीन इनटेक के चक्कर में आप जो बाजार से पनीर खरीद कर बड़े चाव से खा रहे हैं, तो संभल जाइये. वरना लेने के देने पड़ सकते हैं. ये प्रोटिन जहरीला हो सकता है. वह आपकी जान ले सकता है. सूरत के पांडेसरा इलाके में हुई एक बड़ी छापेमारी ने ऐसे ही जहरीले पनीर बनाने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया है. यहां एक ऐसी फैक्ट्री पकड़ी गई है जहां पनीर बनाने के लिए नींबू या दही नहीं, बल्कि फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक एसिड का उपयोग किया जा रहा था.

3 मार्च 2026 को सूरत सिटी एस.ओ.जी. और खाद्य विभाग की ज्वॉइंट टीम ने जब पांडेसरा की एक यूनिट पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देख कर आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. चारों तरफ गंदगी के बीच करीब 1,401 किलो खुला पनीर रखा था. लैब टेस्टिंग में यह पनीर पूरी तरह सब-स्टैंडर्ड पाया गया. पुलिस ने मौके से पामोलिन तेल के डिब्बे, एसिडिक केमिकल्स और पनीर बनाने वाली मशीनें जब्त कीं, जिनकी कुल कीमत 28,44,170 रुपये आंकी गई है.

400 किलो जहर की रोजाना सप्लाई

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यह गोरखधंधा पिछले दो साल से निर्बाध रूप से चल रहा था. यहां से रोजाना लगभग 400 किलो मिलावटी पनीर तैयार कर सूरत के स्थानीय बाजारों, बड़े होटलों, हाईवे के ढाबों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को सप्लाई किया जाता था. आरोपी महेश कुमार शर्मा के पास महाराष्ट्र का लाइसेंस था, जिसकी आड़ में वह गुजरात में यह अवैध धंधा चला रहा था. पांडेसरा पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है.

किडनी फेलियर का खतरा

मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार, इंडस्ट्रियल एसिड और गैर-खाद्य रसायनों से बना पनीर इंसानी शरीर के लिए ‘धीमा ज़हर’ है. इसका सेवन करने से न केवल फूड पॉइजनिंग और पेट का संक्रमण होता है, बल्कि लंबे समय तक इस्तेमाल से लिवर खराब होना और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं.

सरकार का नया फरमान

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एक नया आदेश जारी किया है. अब ‘Paneer Analogue’ (वनस्पति वसा या स्टार्च से बना पनीर विकल्प) बेचने वाले ऑपरेटरों के लिए पैकेट पर स्पष्ट रूप से ‘एनालॉग’ लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. अगर कोई होटल या दुकानदार इसे असली ‘पनीर’ बताकर बेचता है, तो इसे दंडनीय अपराध माना जाएगा.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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