हैदराबाद: जब भी जुबां पर हैदराबाद का नाम आता है तो दिमाग में सबसे पहले तीखी और चटपटी दम बिरयानी की तस्वीर उभरती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि निजामों के इस शहर में बिरयानी का एक ऐसा भी रूप है जो न तो लाल है और न ही पीला है. जी हां, इसे सोफियानी बिरयानी जिसे आम बोलचाल में सफेद बिरयानी या दूध की बिरयानी भी कहा जाता है. मिर्च-मसालों के शोर में यह शाही डिश आज भी अपनी नजाकत और सौम्य स्वाद के लिए जानी जाती है.
सोफियानी बिरयानी के लिए इन सामाग्रियों की पड़ेगी जरूत
फातिमा खान के अनुसार, हैदराबाद की असली सोफियानी बिरयानी बनाने की रेसिपी काफी नज़ाकत भरी होती है. चार लोगों के लिए इस बिरयानी को बनाने के लिए आवश्यक सामग्री के रूप में मटन या चिकन 1 किलो, बासमती चावल 750 ग्राम, दूध 2 कप फुल, क्रीम, ताजी मलाई या क्रीम आधा कप, , खोया 50 ग्राम कद्दूकस किया हुआ, सफेद मिर्च पाउडर, हरी मिर्च का पेस्ट, अदरक-लहसुन पेस्ट 2 बड़े चम्मच, काजू और बादाम का पेस्ट, खड़े गरम मसाले इलायची, दालचीनी, लौंग, जावित्री और शाजीरा की जरूरत पड़ती है. साथ ही घी 1 कप और नमक स्वादानुसार की जरूत पड़ती है.
सोफियानी बिरयानी बनाने के लिए इन स्टेप को करें फोलो
फातिमा खान ने बताया कि इसको बनाने के लिए सबसे पहले मांस को धोकर एक बड़े बर्तन में लें. इसमें अदरक-लहसुन पेस्ट, हरी मिर्च का पेस्ट, सफेद मिर्च पाउडर, नमक, काजू-बादाम का पेस्ट और फेंटा हुआ दही मिलाएं. इसे कम से कम 2 घंटे के लिए छोड़ दें. इसके बाद एक भारी तले वाले बर्तन में घी गरम करें और उसमें खड़े मसाले डालें। अब मैरिनेट किया हुआ मांस डालें और इसे तब तक भूनें जब तक घी अलग न होने लगे. अब इसमें 1 कप दूध और खोया डालकर धीमी आंच पर पकाएं जब तक मांस 80% गल न जाए.
दूसरे बड़े बर्तन में पानी उबालें. इसमें नमक, थोड़ी इलायची और शाजीरा डालें. बासमती चावल डालकर उन्हें तब तक पकाएं जब तक वे 70% पक न जाएं. फिर चावल छान लें. पके हुए मांस के ऊपर आधा कप मलाई और बचा हुआ दूध फैला दें. अब इसके ऊपर उबले हुए चावल की परत बिछाएं. ऊपर से थोड़ा घी और इलायची पाउडर छिड़क दें. बर्तन के ढक्कन को आटे से सील कर दें. इसे पहले 5 मिनट तेज़ आंच पर और फिर 20-25 मिनट बिल्कुल धीमी आंच पर दम होने दें.
सोफियानी बिरयानी को सफेदा भी कहा जाता है
इतिहासकारों के अनुसार, इस बिरयानी को सफेदा भी कहा जाता था. कहा जाता है कि इसे उन शाही मेहमानों के लिए तैयार किया गया था जो बहुत ज्यादा तीखा खाना पसंद नहीं करते थे. यह डिश हैदराबाद की उस तहजीब का हिस्सा है, जहां खाने को सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं बल्कि कला माना जाता था. शाही परिवारों में आज भी खास मौकों जैसे निकाह या चांदनी रातों के जश्न में इसे विशेष रूप से बनवाया जाता है.





