कभी गांव-गांव में मदारी भालू के साथ घूमकर लोगों का मनोरंजन किया करते थे. ढोलक की थाप पर भालू का खेल बच्चों और ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र होता था. इसी दौरान एक मान्यता भी प्रचलित हो गई थी कि दुबले-पतले बच्चों को भालू से ‘फूंक’ मरवाने पर वे जल्दी स्वस्थ और मोटे हो जाते हैं. कई लोग इस पर विश्वास कर अपने बच्चों को भालू के पास ले जाते थे. भालू के मुंह पर ‘जाबी’ नाम का लोहे का उपकरण लगा दिया जाता था, जिससे वह मुंह पूरी तरह खोल नहीं पाता था. केवल हवा बाहर निकालता था, जिसे लोग ‘फूंक’ समझ लेते थे. हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. डी.एस. श्रीवास्तव के अनुसार इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. यह केवल एक भ्रम था, जिसका फायदा मदारी अपनी कमाई के लिए उठाते थे.






