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Moongfali Ki Kheti Tips: गर्मी के मौसम में गेहूं और चना की कटाई के बाद खेत खाली रह जाते हैं, ऐसे में मूंगफली की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. यह फसल कम पानी और कम देखरेख में अच्छी पैदावार देती है. सही बीज चयन, समय पर बुवाई और उचित सिंचाई से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. मूंगफली की खेती मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है और फसल चक्र को संतुलित करती है. यह एक कम लागत और अधिक लाभ देने वाली फसल है, जो किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है.
मूंगफली की खेती की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे लगाने के लिए किसानों को भारी मेहनत या बड़े निवेश की जरूरत नहीं पड़ती. खेत की जुताई दो से तीन बार कर दी जाए और जमीन को भुरभुरी बना दिया जाए, तो मूंगफली के बीज आसानी से अंकुरित हो जाते हैं. गर्मी के मौसम में सिंचाई की व्यवस्था भी ज्यादा जटिल नहीं होती, क्योंकि यह फसल सामान्यतः 8 से 10 दिन के अंतराल पर पानी मांगती है, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसान भी इसे आसानी से संभाल सकते हैं. बीज की बुवाई कतारों में करने से पौधों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है, जिससे फसल रोगों से सुरक्षित रहती है.

पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक गर्मी का मौसम दस्तक दे चुका है और इसी के साथ रबी सीजन की फसलें गेहूं और चना भी खेतों से निकलने लगी हैं. ऐसे समय में किसानों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न रहता है कि अगली फसल कौन-सी बोई जाए, जिससे कम समय और कम लागत में बेहतर आमदनी प्राप्त की जा सके. गर्मी में मूंगफली की खेती एक बेहतरीन ऑप्शन है, क्योंकि गेहूं और चने की कटाई के तुरंत बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, जो मूंगफली के बीज जमने के लिए आदर्श मानी जाती है. इसके साथ ही यह फसल 90 से 110 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान बरसात शुरू होने से पहले ही अच्छा उत्पादन ले सकते हैं.

मूंगफली की खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी काफी लाभकारी मानी जाती है. गर्मी में बोई गई मूंगफली का बाजार मूल्य अक्सर स्थिर रहता है और मांग पूरे साल बनी रहती है. किसान यदि 1 बीघा जमीन में सही तरीके से मूंगफली लगा दें, तो आसानी से 6 से 8 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे अच्छा मुनाफा मिलता है. इसके अलावा मूंगफली की पत्तियाँ और पौधों का अवशेष पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में इस्तेमाल हो जाता है, जिससे पशुपालन करने वाले किसानों को दोहरा लाभ मिलता है. मूंगफली बेचकर त्वरित नकदी प्राप्त हो जाती है, जो किसानों को अगले सीजन के लिए संसाधन जुटाने में मदद करती है.
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खेती के दौरान खाद और उर्वरकों का सही उपयोग मूंगफली की पैदावार को कई गुना बढ़ा देता है. साधारण खेत में 5 से 7 टन गोबर खाद मिलाना, साथ ही बेसल डोज में जिप्सम और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व डालना, फसल को अधिक दानेदार और भरपूर उत्पादन वाला बनाता है. मूंगफली की फसल में कीटों का प्रकोप भी अन्य गर्मी की फसलों की तुलना में काफी कम होता है, इसलिए कीटनाशकों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता. किसान चाहें तो जैविक तरीके अपनाकर भी बहुत अच्छी उपज ले सकते हैं, क्योंकि मूंगफली की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन को स्थिर करती हैं, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति और बढ़ जाती है.

गर्मी के मौसम में गेहूं और चने की कटाई के बाद मूंगफली की खेती किसानों के लिए न केवल आसान है, बल्कि अत्यंत फायदेमंद भी है. इसमें मेहनत कम और लाभ ज्यादा मिलता है, साथ ही खेत की मिट्टी भी उपजाऊ बनती है, जिससे अगले सीजन की फसलों को खास फायदा होता है. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल उन किसानों के लिए वरदान साबित होती है, जो कम लागत में अधिक आमदनी की तलाश में रहते हैं. कृषि विभाग भी किसानों को गर्मी में मूंगफली की खेती अपनाने की सलाह दे रहा है, ताकि वे बढ़ते मौसमीय बदलाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच स्थिर आय का साधन बना सकें.





