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गुजरात में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ईशुदान गढ़वी की गिरफ्तारी के बाद सियासी बवाल मच गया है. अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह समेत ‘आप’ के दिग्गज नेताओं ने इसे भाजपा की हार का डर और तानाशाही करार दिया है. पार्टी का आरोप है कि गुजरात में कार्यकर्ताओं पर झूठी एफआईआर और गिरफ्तारियों का दौर जारी है. कार्यकर्ता की पैरवी करने थाने पहुंचे गढ़वी को हिरासत में लेना लोकतंत्र की हत्या है.
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह.
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. गुजरात प्रदेश अध्यक्ष ईशुदान गढ़वी को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इसे सीधा हमला बताया है. केजरीवाल का कहना है कि पिछले तीन महीनों में गुजरात में ‘आप’ कार्यकर्ताओं के खिलाफ 145 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. करीब 160 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया है. भाजपा गुजरात में अपनी जमीन खिसकती देख बौखला गई है. ईशुदान गढ़वी कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारी का हिसाब लेने थाने गए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें ही पकड़ लिया. अब जनता इस अत्याचार का बदला लेगी और भाजपा का घमंड तोड़ेगी.
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पार्टी मुख्यालय में तीखे सवाल दागे. उन्होंने कहा कि मंगलवार को कार्यकर्ता दीपक कुमार को गुंडों ने पीटा, लेकिन पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही गिरफ्तार कर उस पर धारा 307 लगा दी. जब प्रदेश अध्यक्ष ईशुदान गढ़वी अपने कार्यकर्ता की मदद के लिए पहुंचे, तो उन्हें भी सलाखों के पीछे डाल दिया गया. संजय सिंह ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह के गढ़ में भाजपा की घबराहट का संकेत है. केजरीवाल की रैलियों में उमड़ रही भीड़ ने भाजपा के सिंहासन को हिला दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि ‘आप’ के लोग लाठियों और जेल से नहीं डरते, वे बाहर आकर फिर से लड़ेंगे.
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री को गुजरात का पुराना इतिहास याद दिलाया. उन्होंने जिक्र किया कि कैसे 1975 से पहले मेस की फीस बढ़ने पर हुए छात्र आंदोलन ने तत्कालीन सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था. आज भी गुजरात की जनता भाजपा के अहंकार और अत्याचार को देख रही है. सत्ता जब जुल्म करती है, तो वह उसके पतन का कारण बनती है. गुजरात में आगामी पंचायत और नगर निगम चुनावों के डर से यह कार्रवाई की जा रही है. ईशुदान गढ़वी एक बहादुर नेता और प्रखर वक्ता रहे हैं, जिन्होंने पत्रकार के तौर पर भी जनता को जगाया है. उन्हें दबाना मुमकिन नहीं है.
गुजरात में केजरीवाल जी की जनसभाओं में उमड़ रहा जनसैलाब, वहीं मोदी की सभाओं में सन्नाटा पसर रहा है।




