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Koderma News: कोडरमा में एलपीजी संकट गहराने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है. घरेलू उपभोक्ताओं के बाद अब छात्रों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है. झुमरी तिलैया में लॉज में रहने वाले छात्र गैस नहीं मिलने से खाना नहीं बना पा रहे, महंगे मेस पर निर्भर हैं और मजबूरन गांव लौट रहे हैं. स्थिति एक महीने से गंभीर बनी हुई है.
खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखने लगा है. झारखंड भी इससे अछूता नहीं है. राज्य के कई जिलों में एलपीजी की किल्लत गहराती जा रही है. कोडरमा में पहले जहां आम घरेलू उपभोक्ता गैस की कमी से जूझ रहे थे.वहीं अब इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने लगा है. जिले में पिछले एक महीने से एलपीजी की भारी कमी बनी हुई है. हालात यह हैं कि लोग सुबह-सुबह गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हो जाते हैं. बावजूद इसके नंबर नहीं आने पर सभी को गैस नहीं मिल पाती. कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.
गैस नहीं मिलने से धीरे-धीरे अधिकांश छात्र लौट रहे गांव
सबसे ज्यादा प्रभावित झुमरी तिलैया शहर में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राएं हैं. यहां सैकड़ों विद्यार्थी लॉज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य पढ़ाई की तैयारी करते हैं. ये छात्र खुद खाना बनाकर अपना खर्च नियंत्रित रखते थे. लेकिन गैस की कमी ने उनकी दिनचर्या पूरी तरह बिगाड़ दी है. कोचिंग छात्र दीपक यादव ने बताया कि पिछले एक महीने से गैस नहीं मिलने के कारण उनकी स्थिति बेहद खराब हो गई है. वह अपने 10 साथियों के साथ लॉज में रहते थे. लेकिन अब सभी साथी धीरे-धीरे घर लौट चुके हैं. वर्तमान में वह अकेले रह गए हैं और उनके पास भी सिर्फ एक-दो दिन का गैस बचा है. दीपक कहते हैं कि गैस खत्म होते ही उन्हें भी मजबूरन घर लौटना पड़ेगा. जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होगी.
महंगा हुआ मेस का खाना
वहीं जयनगर प्रखंड के हीरोडीह निवासी आनंद यादव जो पिछले छह महीने से झुमरी तिलैया में रहकर जनरल कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पहले उन्हें कभी इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा. लेकिन बीते एक महीने से गैस संकट ने उनकी पढ़ाई को प्रभावित कर दिया है. उन्होंने कहा कि पहले वह 30 से 40 रुपये में मेस में खाना खा लेते थे. लेकिन अब वही खाना 60 से 70 रुपये में मिल रहा है. जो उनके लिए वहन करना मुश्किल हो गया है. उन्हें गैस कनेक्शन भी नहीं मिलता है बाजार में खुले तौर पर मिलने वाले छोटे गैस सिलेंडर में गैस भर कर उन्हें अपना काम चलाना पड़ता था. अब किल्लत के बीच बाजार से भी गैस मिलना मुश्किल हो गया है. यही वजह है कि कई छात्र अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़कर गांव लौट रहे हैं.





