चिकन नेक से लाहौर के करीब तक, नजर उठाई तो कुछ ही मिनटों में आएगी प्रलय – rafale fighter jet 150 unit 8 squadron deployment plan lahore to chicken neck

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चिकन नेक से लाहौर के करीब तक, नजर उठाई तो कुछ ही मिनटों में आएगी प्रलय

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Rafale Fighter Jet: भारत ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्‍ताव को हरी झंडी दे दी है. इस खेप की आपूर्ति मुकम्‍मल होने के बाद इंडियन एयफोर्स के पास कुल 150 विमान हो जाएंगे. इसे देखते हुए अब राफेल की संभावित तैनाती का खाका तैयार किया जाने लगा है. चीन, पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश बॉर्डर इसके सेंटर में है.

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114 राफेल फाइटर जेट की आपूर्ति होने के बाद इंडियन एयरफोर्स के पास इस क्‍लास के कुल 150 लड़ाकू विमान हो जाएंगे. (फाइल फोटो/Reuters)

Rafale Fighter Jet: भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी लड़ाकू क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम के तहत 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट (Rafale fighter jet) विमानों की खरीद की योजना पर काम जारी है. यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो पहले से शामिल 36 राफेल विमानों के साथ मिलकर वायुसेना के पास 150 से अधिक राफेल होंगे, जो लगभग आठ स्क्वाड्रनों के बराबर ताकत प्रदान करेंगे. इनकी तैनाती हासीमारा एयर बेस (चिकन नेक के करीब) और अंबाला में करने की योजना है. बता दें कि अंबाला पाकिस्‍तान के बड़े शहर लाहौर से 300 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है. वहीं, चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर चीन और बांग्‍लादेश बॉर्डर के पास है.

यह रणनीति भारत के सामने मौजूद दोहरे मोर्चे चीन (China) और पाकिस्‍तान (Pakistan) की चुनौती को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. वायुसेना का उद्देश्य एक ऐसी लचीली और घातक स्ट्राइक क्षमता विकसित करना है, जो युद्ध की शुरुआती अवस्था में ही दुश्मन पर निर्णायक बढ़त दिला सके. सूत्रों के अनुसार, राफेल बेड़े की तैनाती तीन प्रमुख एयरबेस (Ambala Air Force Station, Hasimara Air Force Station और Gwalior Air Force Station) के इर्द-गिर्द केंद्रित होगी. इन बेसों को पहले ही आधुनिक बुनियादी ढांचे, विशेष मेंटेनेंस सुविधाओं, सिमुलेटर और एडवांस हथियार प्रणालियों से लैस किया जा चुका है. हरियाणा स्थित अंबाला एयर फोर्स स्टेशन, जहां फिलहाल नंबर 17 स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरोज तैनात है, पश्चिमी मोर्चे के लिए सबसे अहम केंद्र माना जाता है. यह बेस पंजाब, नियंत्रण रेखा (LoC) और पाकिस्तान के अंदरूनी क्षेत्रों तक तेज पहुंच प्रदान करता है. माना जा रहा है कि यहां एक या दो अतिरिक्त राफेल स्क्वाड्रन तैनात किए जा सकते हैं, जिससे युद्ध के शुरुआती घंटों में अधिकतम उड़ान (sortie) दर हासिल कर दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय किया जा सके.

ईस्‍टर्न थिएटर

पूर्वी क्षेत्र में पश्चिम बंगाल का हासीमारा एयर फोर्स स्टेशन, जहां नंबर 101 स्क्वाड्रन फाल्कन्स तैनात है, चीन के खिलाफ रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. यह बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है) के करीब स्थित है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पूर्वी सेक्टर तक तुरंत पहुंच देता है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, MRFA के तहत यहां एक और राफेल स्क्वाड्रन की तैनाती से हिमालयी क्षेत्रों में लगातार कॉम्बैट एयर पेट्रोलिंग (CAP) सुनिश्चित की जा सकेगी. इस पूरी योजना में सबसे बड़ा बदलाव ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन को लेकर देखने को मिल सकता है. मध्य प्रदेश स्थित यह बेस लंबे समय से Mirage 2000 विमानों का गढ़ रहा है, जो भारत की सटीक हमले (precision strike) क्षमता और परमाणु डिलीवरी प्लेटफॉर्म के रूप में जाने जाते हैं. हालांकि, 2030 के आसपास मिराज-2000 विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना है. ऐसे में ग्वालियर को राफेल के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है, जहां दो से तीन स्क्वाड्रन तैनात किए जाने की संभावना है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे विशेष रणनीतिक बढ़त देती है. सीमावर्ती इलाकों से दूर होने के कारण यह फर्स्ट डे ऑफ वॉर (FDOW) में मिसाइल हमलों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है, जबकि यहां से पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर तेजी से ऑपरेशन संभव है.

राफेल से बढ़ेगी ताकत

राफेल बेड़े की यह तैनाती नीति वायुसेना की युद्ध क्षमता को काफी बढ़ाएगी. प्रदान करेगी. ये विमान एयर सुपीरियोरिटी, डीप स्ट्राइक, परमाणु प्रतिरोध (nuclear deterrence) और सटीक जमीनी हमलों जैसे विभिन्न मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि अंबाला और हासीमारा जैसे अग्रिम ठिकानों पर तैनाती के साथ-साथ ग्वालियर जैसे सुरक्षित और केंद्रीय बेस का विकास वायुसेना को संतुलित और टिकाऊ ताकत देगा. इससे न केवल दुश्मन पर शुरुआती दबाव बनाया जा सकेगा, बल्कि लंबे समय तक ऑपरेशन जारी रखने की क्षमता भी सुनिश्चित होगी. यदि MRFA कार्यक्रम तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ता है, तो राफेल आने वाले दशक में भारतीय वायुसेना की रीढ़ बन सकता है. यह भविष्य में स्वदेशी HAL Tejas Mk2 और AMCA जैसे उन्नत प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर भारत की वायु शक्ति को नई दिशा देगा.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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