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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: दक्षिण भारत में तमिलनाडु का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है. सत्तारूढ़ डीएमके पर एंटी इनक्म्बेंसी का असर पड़ने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा रहा है. ऐसे में प्रदेश कांग्रेस के टॉप लेवल से कमजोर सीटें देने का आरोप लगना अपने आप में काफी अहम है.
तमिलनाडु कांग्रेस चुनाव मैनेजमेंट एवं कोऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन मणिकम टैगोर ने इस्तीफे की पेशकश की है. (फाइल फोटो)
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में फिर से महाकलह की शुरुआत हो गई है. प्रदेश चुनाव मैनेजमेंट एवं कोऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन मणिकम टैगोर ने पार्टी के अध्यक्ष के समक्ष अपने इस्तीफे की पेशकश की है. सूत्रों की मानें तो मणिकम टैगोर तमिलनाडु में सीट शेयरिंग से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी को जानबूझकर विधानसभा की कमजोर सीटें दी गई हैं. प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि इससे विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन गड़बड़ हो सकता है. बता दें कि तमिलनाडु में सीट बंटवारे से पहले सत्तारूढ़ डीएमके ने कांग्रेस पर जल्द से जल्द सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने का दबाव डाला था. अब कांग्रेस के अंदर से ही तमिलनाडु में सीट बंटवारे को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं.
सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में पार्टी संगठन को लेकर असंतोष सामने आया है. मणिकम टैगोर (Manickam Tagore) जो राज्य चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष हैं, ने पार्टी प्रमुख के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश की है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को राज्य में कमजोर सीटें मिली हैं, जिससे चुनावी संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने अपने पत्र में संगठनात्मक रणनीति और सीट बंटवारे पर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि मौजूदा हालात में पार्टी को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है. इस्तीफे के बाद पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है, वहीं इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है.
मणिकम को किस बात का डर
सूत्रों के मुताबिक, सीनियर लीडर मणिकम टैगोर का मानना है कि प्रदेश कांग्रेस ने कोटे के तहत मिली 28 में से आधी वो सीटें स्वीकार कर लीं, जहां पार्टी का जीतना मुश्किल है. विरुधुनगर से लोकसभा सांसद मणिकम पहले एक्टर विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम'(Tamilaga Vettri Kazhagam, TVK) के साथ कांग्रेस के गठबंधन की कोशिशों में लगे थे. अब उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर चुनाव समन्वय की देखरेख करने वाली समिति के प्रमुख पद से अपना इस्तीफा देने की पेशकश की है. कहा यह भी जा रहा है कि वह कांग्रेस द्वारा चुने गए उम्मीदवारों से भी खुश नहीं हैं.
कांग्रेस के खाते में कितनी सीटें?
यह फैसला ऐसे समय में आया जब कांग्रेस ने अभी तक चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम तय नहीं किए हैं. DMK की अगुवाई वाले गठबंधन में कांग्रेस के खाते में 28 सीटें आई हैं. उम्मीदवारों के नाम तय नहीं होने से चुनाव प्रचार में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बुधवार को राज्य में एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब मुख्यमंत्री एमके. स्टालिन को त्रिची के थुरैयूर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस की ओर से कोई उम्मीदवार तय नहीं हो पाने की वजह से सिर्फ ‘हाथ’ के चुनाव चिह्न पर वोट मांगना पड़ा.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें





