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महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्ग का 5 परसेंट एजुकेशन कोटा खत्म किया है. इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है. याचिकाकर्ता ने कहा कि यह कदम पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है. इससे पहले से कोटा ले रहे छात्रों का भविष्य पूरी तरह खराब हो जाएगा.
आरक्षण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है. (सांकेतिक तस्वीर)
मुंबई. महाराष्ट्र में मुसलमानों के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए शिक्षा में मिलने वाले पांच प्रतिशत आरक्षण को समाप्त करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई, जिसमें दावा किया गया कि सरकार का यह निर्णय भेदभावपूर्ण है और इससे मुस्लिम समुदाय के उन छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा जो पहले इस आरक्षण का लाभ उठा रहे थे.
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीरता से लिया और महाराष्ट्र सरकार से इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा. राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए निश्चित समय दिया गया. फिलहाल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस फैसले पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई, लेकिन मामले की संवेदनशीलता और संभावित प्रभाव को देखते हुए विस्तृत सुनवाई के लिए तारीख तय की गई है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी भी निर्णय का छात्रों के शैक्षणिक अवसरों पर असर हो सकता है, इसलिए इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनना आवश्यक है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आरक्षण का यह कटौती कदम समुदाय के अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है और इससे भविष्य में शिक्षा में समान अवसरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 मई को तय की है. इस दौरान राज्य सरकार को अपने निर्णय के पक्ष और तर्क प्रस्तुत करने होंगे, ताकि कोर्ट इस मामले का न्यायसंगत और संतुलित फैसला दे सके. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे राज्य में आरक्षण नीति और समान अवसरों के मुद्दे पर एक अहम उदाहरण साबित हो सकता है.
साथ ही, हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि न्यायालय सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय देगा. याचिकाकर्ता और सरकार दोनों को इस मामले में पूर्ण तर्क और दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, ताकि छात्रों के अधिकारों और सरकारी नीति के बीच संतुलन बना रहे.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





