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Investment Tips : ‘जब सड़कों पर खून बह रहा हो, तब भी खरीद जारी रखें-भले ही वह खून आपका ही क्यों न हो.’ यह मशहूर कथन अक्सर वॉरेन बफेट से जोड़ा जाता है, लेकिन वास्तव में इसे मशहूर अरबपति बैंकर बैरन रोथ्सचाइल्ड ने कहा था. उनका मानना था कि निवेश में कई बार भीड़ के विपरीत जाकर फैसले लेना ज्यादा फायदेमंद होता है. एक बार फिर इसे सही साबित करने का समय आ गया है, जब ईरान युद्ध ने बाजार को लहुलुहान कर रखा है, तब भी एक निवेशक के तौर पर आपको सही जगह पैसे लगाने से पीछे नहीं हटना चाहिए.
बाजार एक्सपर्ट ईरान युद्ध में भी मुनाफा कमाने का मौका बता रहे हैं.
बाजार की भाषा में इस सोच को कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टिंग कहा जाता है. इस रणनीति में निवेशक उस समय शेयर खरीदते हैं जब बाजार में नकारात्मक माहौल हो या कोई शेयर दबाव में चल रहा हो. स्वतंत्र बाजार विशेषज्ञ अंबरीश बलिगा ने ऐसे ही 5 शेयरों की पहचान की है, जो मौजूदा स्तर पर आकर्षक नजर आ रहे हैं. उनका मानना है कि युद्ध जैसे अनिश्चित माहौल के बावजूद इन शेयरों में निकट भविष्य में अच्छा उछाल देखने को मिल सकता है. यहां पैसे लगाने वाले निवेशक कुछ समय में ठीकठाक मुनाफा कमा सकते हैं.
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल लिमिटेड : बाजार एक्सपर्ट ने हिमाद्री स्पेशियलिटी केमिकल्स एक प्रमुख इंटीग्रेटेड कार्बन और स्पेशियलिटी केमिकल निर्माता कंपनी है. कंपनी ने कोल टार डिस्टिलेशन से लेकर कार्बन ब्लैक, एडवांस्ड पिच और स्पेशियलिटी ऑयल्स जैसे वैल्यू-एडेड उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन तैयार की है. पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने साधारण औद्योगिक उत्पादों से हटकर उच्च मार्जिन वाले विशेष उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया है. इसकी 30% कमाई निर्यात से आती है और कच्चे माल का अधिकांश हिस्सा देश के भीतर से ही मिलता है. लिहाजा ईरान युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर सीमित रहने की संभावना है. मजबूत बैलेंस शीट (371 करोड़ नेट कैश), 34% आरओसीई और विविध बाजारों में मौजूदगी इसे गिरावट के दौर में भी मजबूती देती है. वित्तवर्ष 2028 तक कंपनी का ईपीएस 21 रुपये रहने का अनुमान है और टारगेट प्राइस 630 रुपये रखा गया है.
शक्ति पंप्स : सोलर और बिजली से चलने वाले सबमर्सिबल पंप बनाने वाली यह अग्रणी कंपनी है. इसके उत्पाद कृषि, औद्योगिक उपयोग, बिल्डिंग सेवाओं और घरेलू जरूरतों में इस्तेमाल होते हैं. देशभर में कंपनी के 500 से ज्यादा डीलर और 400 सर्विस सेंटर हैं, जबकि निर्यात के मामले में यह 100 से अधिक देशों में मौजूदगी रखती है. सरकार की पीएम कुसुम योजना में कंपनी की करीब 25% हिस्सेदारी है और इसके पास लगभग 2,000 करोड़ रुपये का मजबूत ऑर्डर बुक भी है. कंपनी अब केवल सोलर पंप निर्माता से आगे बढ़कर क्लीन-टेक समाधान देने वाली कंपनी बनने की दिशा में काम कर रही है. वित्तवर्ष 2028 तक ईपीएस 45 रुपये और टारगेट प्राइस 900 रुपये रखा गया है.
सैजिलिटी : सैजिलिटी हेल्थकेयर सेक्टर को ऑपरेशनल और टेक्नोलॉजी सेवाएं प्रदान करती है. कंपनी मुख्य रूप से हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के लिए बैकएंड प्रक्रियाओं को संभालती है, जो स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. पिछले एक साल में कंपनी की ग्रोथ में तेजी देखने को मिली है और लंबे समय में इसका बिजनेस आउटलुक भी सकारात्मक नजर आता है. अनुमान है कि वित्तवर्ष 2028 तक कंपनी का राजस्व 10,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच सकता है. इसका ईपीएस 3 रुपये और टारगेट प्राइस 54 रुपये रखा गया है.
ईएमएस लिमिटेड : यह कंपनी मुख्य रूप से पानी और अपशिष्ट जल (वॉटर और वेस्टवॉटर) प्रोजेक्ट्स से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का निर्माण और प्रबंधन करती है. कंपनी के ऑर्डर बुक का लगभग आधा हिस्सा यानी करीब 1,100 करोड़ अभी शुरुआती डिजाइन और इंजीनियरिंग चरण में है. इसके अलावा करीब 4,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं. आने वाले एक साल में कंपनी की कहानी नए ऑर्डर जीतने से ज्यादा मौजूदा प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने पर निर्भर करेगी. वित्तवर्ष 2028 के लिए इसका ईपीएस 38 रुपये और टारगेट प्राइस 380 रुपये रखा गया है.
ओर्कला इंडिया : यह कंपनी पैकेज्ड फूड्स सेक्टर की कंपनी है, जो मसाले और तैयार खाद्य उत्पाद बेचती है. इसके पोर्टफोलियो में एमटीआर फूड्स और ईस्टन कॉन्डिमेंट्स जैसे मजबूत ब्रांड शामिल हैं. कंपनी की लगभग 70% कमाई दक्षिण भारत से आती है, जहां पैकेज्ड फूड की खपत भी ज्यादा है. दक्षिण भारत देश के कुल जीडीपी का करीब 30% योगदान देता है और यहां प्रति व्यक्ति पैकेज्ड फूड पर खर्च भी अधिक है. बेहतर वितरण नेटवर्क, उत्पाद विविधता और बिक्री चैनलों में सुधार के जरिये कंपनी आने वाले समय में अपनी कमाई को लगातार बढ़ाने की स्थिति में है. वित्तवर्ष 2028 तक इसका ईपीएस 27 रुपये रहने का अनुमान है और टारगेट प्राइस 756 रुपये तय किया गया है.
एक्सपर्ट का मानना है कि शेयर बाजार में अभी भले ही गिरावट का दौर दिख रहा है, लेकिन जैसे ही युद्ध थमेगा और ग्लोबल मार्केट के साथ इकनॉमी पटरी पर आएगी, फिर से बाजार अपने पुराने रंग में लौट आएगा. आने वाले समय में शेयर बाजार की तेजी का लाभ उन कंपनियों को बेहतर मिलेगा, जिनका फंडामेंटल मजबूत है और उत्पादन के लिए कच्चा माल ज्यादातर देश के भीतर से ही प्राप्त होता है. ऐसी कंपनियों को बाहरी सप्लाई पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिसका फायदा उनके प्रदर्शन को मिलेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें




