Israel-Iran War: जंग में कितने बिचौलिए? आतंक के रखवाले आखिर क्यों बन गए शांति के पहरेदार?
Israel-Iran War: जंग के बीच अचानक दो शांति दूत सामने आए हैं पाकिस्तान और तुर्की. लेकिन क्या ये सच में शांति चाहते हैं या अपनी राजनीतिक और आर्थिक स्वार्थ के चलते सामने आए हैं?तुर्की, जो ईरान के साथ 500 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, डर रहा है कि अगर ईरान और मजबूत हुआ तो उसका खुद का खतरा बढ़ जाएगा. यहां 20% आबादी कुर्द है और क्षेत्रीय राजनीति तुर्की के लिए चुनौती बन रही है. वहीं पाकिस्तान पहले ही दुनिया में एक्सपोज़ हो चुका है. आतंकियों का पनाहगार और अमेरिका के साथ रिश्ते उसे मीडिएटर के रूप में विवादित बनाते हैं. कतर, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका से मिली फंडिंग पाकिस्तान की भूमिका और जटिल बना रही है. तुर्की और पाकिस्तान इस समय युद्ध के बीच खुद को सुरक्षित रखने और अपने प्रभाव की स्थिति मजबूत करने में लगे हैं. शांति भले ही दिख रही हो, लेकिन असली सवाल यह है कि कौन वास्तव में इसे संभव बनाने के लिए तैयार है. मीडिएटर कौन है, यह जानना सिर्फ शांति के लिए नहीं, बल्कि जंग के नतीजों को समझने के लिए भी अहम है.




