‘जब-जब पाक‍िस्‍तान बना शांत‍िदूत, दुन‍िया हुई लहूलुहान’, मेजर गौरव आर्या ने तालिबान के ‘टॉर्चर’ की कहानी सुनाकर खोली धोखेबाज की पोल

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‘जब-जब PAK बना शांत‍िदूत, दुन‍िया हुई लहूलुहान’, क्‍यों बोले मेजर गौरव आर्या

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ईरान-अमेर‍िका के बीच पाक‍िस्‍तान डील कराने के ल‍िए पूरी ताकत झोंक रहा है. लेकिन मेजर गौरव आर्या ने कहा क‍ि जब भी पाक‍िस्‍तान शांत‍ि दूत बना, समझ‍िए दुन‍िया लहूलुहार हुई है. न्‍यूज18 के शो ‘कमांड सेंटर’ में पाकिस्तान की दोहरी नीति, तालिबान और TTP संग विश्वासघात और शिया विद्रोह के खतरे को बेनकाब किया.

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पाक‍िस्‍तान ईरान जंग में ब‍िचौल‍िया बनने की कोश‍िश कर रहा है. (AP)

जब-जब पाकिस्तान ने ‘शांति दूत’ का चोला पहना है, तब-तब दुनिया ने खून-खराबा और विश्वासघात देखा है. आज जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने के लिए मचल रहा है, तो इतिहास के पन्ने पलटना बेहद जरूरी हो जाता है. पाकिस्तान बार-बार शांति का नाटक करता है, लेकिन नतीजा हमेशा धोखे में बदल जाता है. रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर गौरव आर्या ने ‘कमांड सेंटर’ में पाकिस्तान के दोगलेपन का ऐसा ऑपरेशन किया है, जिसे सुनकर पूरी दुनिया हैरान रह जाएगी. मेजर आर्या ने अफगानिस्तान और तालिबान का उदाहरण देते हुए बताया है कि क्यों कोई भी देश पाकिस्तान पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं कर सकता.

मेजर आर्या ने 2020 के यूएस-तालिबान दोहा शांति समझौते का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की गद्दारी की कुंडली खोली. उन्होंने बताया कि आज तालिबान पाकिस्तान से इतनी नफरत क्यों करता है. “पाकिस्तान ने तालिबान के शीर्ष नेता मुल्ला बरादर को शांति वार्ता के नाम पर पाकिस्तान बुलाया. कहा गया कि पाकिस्तानी सबसे मेहमाननवाज कौम हैं. लेकिन जब मुल्ला बरादर वहां पहुंचा, तो पाकिस्तानियों ने उसे 9 साल तक जेल में बंद रखा और बेरहमी से टॉर्चर किया.” मेजर ने बताया कि तालिबान नेतृत्व इस धोखे को कभी नहीं भूला. तालिबान के एक पूर्व राजदूत ने अपनी किताब में पाकिस्तानियों को ‘दो-मुंहे’ लोग कहा है, जिनकी जुबान पर कुछ और होता है और दिल में कुछ और.

अपने ही बुने जाल में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान ने सोचा था कि अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनवाकर वह वहां अपना पांचवा सूबा (राज्य) स्थापित कर लेगा और वहां की सत्ता को रिमोट कंट्रोल से चलाएगा. लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा. आज वही तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का खुलकर समर्थन कर रहा है और टीटीपी के आतंकी पाकिस्तान की सेना को उन्हीं की जमीन पर गाजर-मूली की तरह काट रहे हैं. जो पाकिस्तान दूसरों के लिए गड्ढा खोद रहा था, आज वह खुद उसमें गिरकर लहूलुहान है.

पाकिस्तानी फौज के अंदर ‘शिया विद्रोह’ का खौफ

अमेरिका और ईरान के बीच टांग अड़ाने के पीछे पाकिस्तान का एक बहुत बड़ा आंतरिक डर भी है. मेजर आर्या ने एक बेहद संवेदनशील पहलू को उजागर करते हुए बताया कि पाकिस्तानी फौज के अंदर एक बड़ी संख्या शिया मुसलमानों की है. ईरान के लिए ये शिया सैनिक बहुत मायने रखते हैं और पाकिस्तान इस बात को लेकर खौफ में है. पाकिस्तानी हुक्मरानों को डर है कि अगर उन्होंने अमेरिका के दबाव में आकर ईरान के खिलाफ कोई भी कदम उठाया, तो पाकिस्तानी फौज के अंदर मौजूद शिया सैनिक अपनी ही स्टेट (सरकार) के खिलाफ हथियार उठा सकते हैं. यह पाकिस्तान के लिए एक गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर देगा.

अब पाकिस्तान की हालत एक ऐसे ‘चुंगी नाके’ जैसी है जो दूसरों के झगड़े में अपनी कमीशन (10-5%) ढूंढ रहा है. न उसकी कोई क्रेडिबिलिटी है, न कोई हैसियत. जो देश अपने पाले हुए आतंकियों से नहीं निपट पा रहा और जहां फौज के अंदर ही विद्रोह का डर सता रहा हो, उसका विश्व शांति की बात करना 21वीं सदी का सबसे बड़ा मजाक है.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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