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उनकी सफलता की सबसे खास बात यह रही कि जिस अकाउंटेंसी विषय को वह सबसे कठिन मानती थीं, उसी में उन्होंने 100 में 98 अंक लाकर सभी को चौंका दिया. यही कारण है कि उनकी यह उपलब्धि पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है.
समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहीउद्दीननगर प्रखंड के हरैल गांव की रहने वाली पुष्पांजलि कुमारी ने इंटरमीडिएट वाणिज्य संकाय में 500 में 466 अंक प्राप्त कर जिले में द्वितीय स्थान हासिल किया है. उनकी सफलता की सबसे खास बात यह रही कि जिस अकाउंटेंसी विषय को वह सबसे कठिन मानती थीं, उसी में उन्होंने 100 में 98 अंक लाकर सभी को चौंका दिया. यही कारण है कि उनकी यह उपलब्धि पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है. यह सफलता केवल अच्छे अंक हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर परिश्रम का उत्कृष्ट उदाहरण भी है. पुष्पांजलि ने साबित कर दिया कि कठिन विषय भी सही रणनीति और मेहनत से सफलता का आधार बन सकता है.
पिता हैं साधारण किसान, परिवार ने दिया पूरा साथ
पुष्पांजलि के पिता अनिल कुमार दुबे एक साधारण किसान हैं. साथ ही पूजा-पाठ कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. वहीं, उनकी माता आशा देवी गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी भी उनकी पढ़ाई में कमी नहीं आने दी. मां ने उन्हें घर के कामों से दूर रखकर पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, वहीं पिता ने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया. उनके दादा देवेंद्र प्रसाद द्विवेदी भी इस सफलता से भावुक हो उठे और अपनी पोती के उज्ज्वल भविष्य की कामना की. परिवार के हर सदस्य का सहयोग उनकी सफलता की मजबूत नींव बना.
स्वअध्ययन और अनुशासन बना सफलता का मंत्र
ग्रामीण क्षेत्र में कॉमर्स संकाय के अच्छे शिक्षकों और कोचिंग संस्थानों की कमी के बावजूद पुष्पांजलि ने हार नहीं मानी. उन्होंने स्व-अध्ययन और ऑनलाइन माध्यम को अपनी तैयारी का आधार बनाया. वह प्रतिदिन 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थीं और समय का सही प्रबंधन करती थीं. उनका लक्ष्य शुरू से स्पष्ट था कि उन्हें 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने हैं. स्कूल की शिक्षिका प्रियंका मैम का मार्गदर्शन भी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा. खास बात यह रही कि परीक्षा केंद्र पर वह कॉमर्स की अकेली छात्रा थीं, फिर भी उनका आत्मविश्वास कभी डगमगाया नहीं.
दूसरों के लिए बनी प्रेरणा
पुष्पांजलि कुमारी की इस सफलता से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है. उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि सफलता के लिए संसाधनों से अधिक मेहनत, समर्पण और सही दिशा जरूरी होती है. आगे उनका सपना सीए और सीएस की पढ़ाई कर एक सफल कंपनी सेक्रेटरी बनना है, ताकि वह अपने परिवार और जिले का नाम और ऊंचा कर सकें.





