Success Story: झारखंड की राजधानी रांची के किसान अब सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खेत से फैक्ट्री तक का सफर तय कर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं. अमित, सतीश और बुधन जैसे युवा किसानों ने पारंपरिक खेती को आधुनिक बिजनेस मॉडल में बदलकर खेती की परिभाषा ही बदल दी है. अमित ने मशरूम की खेती से आगे बढ़कर मशरूम के पापड़, अचार और बिना मैदा के नूडल्स जैसे 30 उत्पाद तैयार किए हैं. आज उनकी दो फैक्ट्रियां हैं. इसका सालाना टर्नओवर ₹2 करोड़ के पार है. वहीं सतीश महतो ने फीडको एग्रोटेक के जरिए मिलेट और मकई के अवशेषों (वेस्ट) की प्रोफेशनल पैकेजिंग कर मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों को सप्लाई करना शुरू किया है. बुधन सिंह पूर्ति ने घर के टब में मोती उगाने का करिश्मा कर दिखाया. उनके स्टॉल पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रुककर सराहना की थी. आज उनकी कंपनी ‘पूर्ति एग्रोटेक’ मोती के गहने और लॉकेट बेचकर सालाना ₹40 लाख से ज्यादा कमा रही है. रांची के इन ‘एग्री-प्रेन्योर्स’ ने साबित कर दिया है कि अगर विजन बड़ा हो, तो मिट्टी से भी सोना निकाला जा सकता है.





