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ईरान जंग रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के जरिए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव ईरान को भेजा है. लेकिन मेजर गौरव आर्या के अनुसार यह प्लान ईरान के लिए मौत का फरमान है. होर्मुज अगर उनके हाथ से छिन गया तो ईरान की लाइफलाइन चली जाएगी.
अमेरिका ने ईरान को 15 प्वाइंट शांति प्रस्ताव भेजा है.
मिडिल ईस्ट में सुलगती आग के बीच एक बड़ी खबर ने दुनिया भर के डिफेंस एक्सपर्ट को चौंका दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अब तक ईरान पर कहर बनकर टूट रहे थे, अचानक शांति की बात करने लगे हैं. सूत्रों के मुताबिक- अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को युद्ध रोकने के लिए ’15 सूत्रीय’ शांति प्रस्ताव भेजा है. इस प्रस्ताव में 30 दिन के सीजफायर से लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म करने जैसी शर्तें शामिल हैं. लेकिन क्या वाकई अमेरिका शांति चाहता है या यह किसी बड़े विनाश से पहले का सन्नाटा है? न्यूज18 के ‘कमांड सेंटर’ में डिफेंस एक्सपर्ट मेजर गौरव आर्या ने इस पूरे प्लान का ऑपरेशन करते हुए अमेरिका की छिपी हुई चाल को बेनकाब कर दिया है.
मेजर गौरव आर्या ने ट्रंप के इस 15 सूत्रीय प्लान को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ा झांसा करार दिया. उन्होंने कहा, इस प्लान में नया कुछ भी नहीं है और ईरान इसे कभी नहीं मानेगा. मेजर आर्या के मुताबिक, सबसे पहला पॉइंट है एक महीने के लिए लड़ाई रोकना. इसका सीधा सा मतलब है कि जो मोमेंटम ईरान को मिला हुआ है, अमेरिका उसे तोड़ना चाहता है. ट्रंप को एक महीने का वक्त शांति बहाल करने के लिए नहीं, बल्कि एक और बड़े और विनाशकारी युद्ध की तैयारी के लिए चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यह ट्रंप का पुराना तरीका है, और एक महीने बाद अमेरिका पहले से भी बड़ा वार करेगा.
होर्मुज ईरान की इकलौती लाइफ लाइन
अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त है कि ईरान समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना कंट्रोल छोड़ दे. इस पर मेजर आर्या ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि यही तो पूरा खेल है! होर्मुज ईरान के हाथ में इकलौती चाबी और सबसे बड़ा हथियार है. ईरान के पास अमेरिका जैसी आधुनिक मिसाइलें भले न हों, लेकिन उसने होर्मुज को ब्लॉक करके पूरी दुनिया की गर्दन पर हाथ डाल रखा है. अगर ईरान इसे खोल देता है और परमाणु हथियार न बनाने की शर्त मान लेता है, तो उसके पास बचेगा ही क्या? फिर तो अमेरिका और इजरायल आसानी से ईरान को कुचल देंगे.
हाथ-पैर काटकर कुर्सी पर बैठाने की साजिश
इस 15 पॉइंट प्लान में ईरान से हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों का समर्थन वापस लेने को भी कहा गया है. मेजर आर्या ने इस पर करारा तंज कसते हुए कहा, “ईरान की असली ताकत उसकी फौज से ज्यादा ये दर्जन भर आतंकी संगठन हैं जो पूरे मिडिल ईस्ट में फैले हैं. हमास और हिजबुल्लाह ही ईरान की असली विदेश नीति हैं.” उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि पहले वह ईरान के हाथ और पैर काट दे, और फिर कहे कि ‘आइए अब कुर्सी पर बैठकर बात करते हैं’.
मेजर आर्या ने साफ कर दिया कि यह 15 सूत्रीय प्लान ईरान के लिए मौत का सामान तैयार करने जैसा है. खाड़ी देश भी जानते हैं कि अगर ईरान के मुंह में खून लग गया और उसने होर्मुज बंद कर दिया, तो दुनिया का गला सूख जाएगा. इसलिए, यह शांति वार्ता नहीं, बल्कि ईरान को निहत्था करने की एक सोची-समझी कूटनीतिक और सैन्य चाल है, जिसे ईरान का नेतृत्व कभी स्वीकार नहीं करेगा.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



