देवघर: झारखंड के देवघर जिले के देवीपुर बाजार में एक ऐसे कारीगर हैं, जिनकी कला आज भी लोगों को हैरान कर देती है. जहां आजकल जूते बनाने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों का इस्तेमाल होता है, वहीं देवीपुर के सीताराम दास अपने हाथों की मेहनत से शानदार चमड़े के जूते और चप्पल तैयार करते हैं. खास बात यह है कि अगर कोई ग्राहक किसी खास डिजाइन की मांग करता है, तो वे उसे बेहद कम समय में तैयार करके दे देते हैं.
दशकों से बना रहे है जूते
सीताराम दास पिछले कई दशकों से इस काम में लगे हुए हैं. उन्होंने अपने इस हुनर की शुरुआत काफी पहले की थी और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना ली. शुरुआत में वे देवघर के मुख्य बाजार में किराए की दुकान चलाते थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपने घर से ही काम करना शुरू कर दिया. खासकर कोरोना काल के बाद उन्होंने पूरी तरह घर से ही जूते-चप्पल बनाना शुरू कर दिया, जिससे उनका काम अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक हो गया.
ये जूते बाजार की पहचान
देवीपुर बाजार की पहचान ही चमड़े के जूतों और चप्पलों से जुड़ी हुई है, जिसमें सीताराम दास का महत्वपूर्ण योगदान है. उनके बनाए जूते न केवल मजबूत होते हैं, बल्कि पहनने में भी काफी आरामदायक होते हैं. यही वजह है कि उनके ग्राहक केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से भी आते हैं. गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, बांका और दुमका जैसे क्षेत्रों से लोग खास तौर पर उनके यहां जूते बनवाने पहुंचते हैं.
पूरी तरह हाथ से तैयार होते हैं जूते
उनके काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे पूरी तरह हाथ से जूते तैयार करते हैं. हर जोड़ी में उनकी मेहनत और वर्षों का अनुभव साफ झलकता है. ग्राहक अपने पैरों का नाप देकर अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन बनवा सकते हैं. चाहे साधारण डिजाइन हो या कोई खास स्टाइल, सीताराम दास हर तरह के जूते बनाने में दक्ष हैं. खास बात यह है कि वे एक से दो दिन के भीतर जूते या चप्पल तैयार कर देते हैं.
कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान
कीमत की बात करें तो उनके यहां जूते-चप्पल काफी किफायती दरों पर उपलब्ध हैं. चमड़े के जूते करीब 400 रुपये से शुरू होकर 1200 रुपये तक मिलते हैं, जबकि चप्पलों की कीमत 100 रुपये से 250 रुपये तक होती है. महिलाओं के लिए भी अलग-अलग डिजाइन के चप्पल उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 150 से 200 रुपये के बीच रहती है. इसके अलावा वे चमड़े के बेल्ट और पर्स भी तैयार करते हैं.
बड़े-बड़े अधिकारी भी बनवाते हैं जूते
उनके ग्राहकों में आम लोगों के साथ-साथ बड़े अधिकारी भी शामिल हैं. जिले के कई सरकारी अधिकारी, यहां तक कि पुलिस विभाग के लोग भी उनसे जूते बनवाते हैं. कई बार पुलिस विभाग की ओर से एक साथ सैकड़ों जोड़ी जूतों का ऑर्डर दिया जाता है, जो उनकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता को दर्शाता है. आज के दौर में, जब हर क्षेत्र में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, ऐसे समय में सीताराम दास जैसे कारीगर अपनी पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं. उनका काम न केवल उनके लिए रोजगार का साधन है, बल्कि यह हमारी पारंपरिक कारीगरी की एक बेहतरीन मिसाल भी है, जिसे सहेजकर रखना बेहद जरूरी है.





