‘धर्मांतरण से दुनिया की ताकत बनना चाहते हैं कुछ लोग, मुसलमान और क्रिश्चियन बनाना सिर्फ एक होड़’

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धर्मांतरण के पीछे है संख्या बढ़ाने का खेल, RSS नेता भैयाजी जोशी का बड़ा बयान

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भैयाजी जोशी ने धर्मांतरण के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मुसलमान और क्रिश्चियन बनाने का सिलसिला लगातार चल रहा है. इसके पीछे का मुख्य मकसद सिर्फ अपनी संख्या बढ़ाना है. लोग मानते हैं कि जिनके पास ज्यादा संख्या होगी, वही दुनिया की ताकत बनेंगे. इसी होड़ के कारण दुनिया में अशांति फैल रही है.

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सुरेश जोशी ने कहा कि सबको साथ लेकर चलने की हिंदू राष्ट्र की जिम्मेदारी है. (आईएएनएस)

पुणे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश जोशी (भैय्याजी) ने गुरुवार को कहा कि धर्मांतरण के पीछे संख्या बल बढ़ाने की सोच काम कर रही है, लेकिन दुनिया का सच्चा नेतृत्व वही कर सकता है, जो सबको साथ लेकर चले.

उन्होंने पुणे में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “धर्मांतरण, मुसलमान बनाना, क्रिश्चियन बनाना, जो यह सिलसिला शुरू हुआ, इसके पीछे का मनोभाव यह है कि जिनके पास संख्या ज्यादा होगी, उन्हें दुनिया की शक्ति के रूप में पहचाना जाएगा. लेकिन इसी कालखंड में एक तीसरा भी समूह था, सोचने वाला.”

उन्होंने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहता कि वह भारत का था, बल्कि दुनिया के ईमानदार और गंभीर तत्वज्ञानी लोग थे. उन्होंने कहा कि जो सबको साथ लेकर चलेगा, वही दुनिया का नेतृत्व करेगा और यह काम केवल और केवल भारत ही कर सकता है, कोई और नहीं.

उन्होंने आगे कहा, “इसी कारण पूरी दुनिया को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी भारत की है, यानी हिंदुओं की है और एक अर्थ में हिंदू राष्ट्र की है. सबको साथ लेकर चलना है. इसी से शांति स्थापित होगी, सत्य स्थापित होगा, न्याय स्थापित होगा. अन्याय समाप्त होगा और अशांति समाप्त होगी.” भैय्याजी जोशी ने कहा कि आज दुनिया में अशांति का मुख्य कारण दो विचारों में, भौतिक संपदा और संख्याबल में छिपा है. इन दोनों के कारण लोग एक-दूसरे को दबाने और संख्या बढ़ाने की होड़ में लगे हुए हैं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की संस्कृति और हिंदू विचारधारा का मूल मंत्र ‘सबको साथ लेकर चलना’ है. यही विचारधारा विश्व में सच्ची शांति, न्याय और समरसता स्थापित कर सकती है. भारत को अपनी इस जिम्मेदारी को समझना होगा और पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह साथ लेकर आगे बढ़ना होगा. संख्या बल या भौतिक संपदा पर आधारित नेतृत्व टिकाऊ नहीं होता. टिकाऊ और सार्थक नेतृत्व केवल समावेशी और सर्वसमावेशक विचार से ही संभव है, जो भारत की प्राचीन संस्कृति में निहित है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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