चेन्नई: थूथुकुडी के चर्चित जयराज और बेनिक्स कस्टोडियल डेथ मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मृतक बेनिक्स की बहन पर्सिस ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. सीएनएन न्यूज18 से खास बातचीत में पर्सिस ने कहा कि अदालत ने न्याय तो किया है लेकिन इस सजा से भी उनके परिवार का वह नुकसान पूरा नहीं होगा जिसे उन्होंने झेला है. लॉकडाउन में तय समय से 15 मिनट देरी तक दुकान खोलने पर नाराज पुलिसकर्मियों ने पिता-पुत्र को कस्टडी में जमकर टॉर्चर किया था.
पर्सिस ने भारी मन से बताया कि उनके पिता और भाई को हिरासत में जिस तरह की अमानवीय और बर्बर यातनाएं दी गईं वह रूह कंपा देने वाली थीं. उन्होंने कहा, “हमने बहुत कुछ सहा है और अपने पिता व भाई दोनों को खो दिया. हमें उम्मीद थी कि न्याय होगा और कोर्ट की जांच के बाद मौत की सजा के फैसले ने साबित कर दिया कि न्याय की जीत हुई है.”
पुलिसिया बर्बरता पर कड़ा संदेश
पेश मामले में कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों की प्रॉपर्टी और बैंक डिटेल मांगी है ताकि परिवार के लिए करीब डेढ़ करोड़ के मुआवजे का इंतजाम किया जा सके. पर्सिस ने इस बात पर जोर दिया कि यह सजा केवल प्रतिशोध नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक सबक है. उन्होंने कहा:
· सतर्क होगी पुलिस: अब किसी को भी हिरासत में प्रताड़ित करने से पहले पुलिसकर्मी सौ बार सोचेंगे.
· यातना पर रोक: इस फैसले के बाद पुलिस किसी पर हमला करने या टॉर्चर करने से पहले इस अंजाम को याद रखेगी.
· मौजूदा स्थिति: पर्सिस ने चिंता जताई कि आज भी कस्टोडियल टॉर्चर की खबरें आती हैं जिस पर कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी की है.
उन्होंने अंत में भावुक होते हुए कहा, “चाहे कितनी भी बड़ी सजा मिल जाए मैं अपने भाई और पिता को वापस नहीं पा सकूंगी लेकिन मैं चाहती हूं कि भविष्य में फिर कभी किसी और के साथ ऐसा न हो.”
सवाल-जवाब
जयराज और बेनिक्स मामले में कोर्ट ने क्या सजा सुनाई है?
अदालत ने मामले की गंभीरता और हिरासत में दी गई बर्बर यातनाओं को देखते हुए दोषी पाए गए सभी 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है.
बहन पर्सिस के अनुसार इस फैसले का पुलिस व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
पर्सिस का मानना है कि इस सख्त सजा से पुलिस विभाग में डर पैदा होगा और भविष्य में कोई भी अधिकारी हिरासत में किसी भी व्यक्ति को शारीरिक प्रताड़ना देने या हमला करने से पहले अंजाम के बारे में सोचेगा.
क्या कोर्ट ने कस्टोडियल टॉर्चर की वर्तमान घटनाओं पर कोई टिप्पणी की?
हाँ, पर्सिस के अनुसार कोर्ट ने भी यह माना है कि आज भी हिरासत में प्रताड़ना की घटनाएं हो रही हैं, और यह फैसला ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.




