‘न बिजली, न पानी… तो वोट किस बात का?’ 16 साल से तरस रहे गांव ने किया विधानसभा चुनाव का बहिष्कार

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‘न बिजली, न पानी… तो वोट नहीं’ दो गांवों का चुनाव बहिष्कार करने का ऐलान

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तमिलनाडु में दो गांव ने आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दी है. अपनी दशकों पुरानी समस्याओं से तंग आकर चुनाव के पूर्ण बहिष्कार और नोटा (NOTA) का बटन दबाने का ऐलान किया है. तिरुचिरापल्ली का नंदावनम गांव पिछले 16 सालों से बिना बिजली, पानी और शौचालय के नर्क जैसा जीवन जीने को मजबूर है. वहीं, ऊटी के पास अज्जूर गांव के आदिवासी अपनी पुश्तैनी जमीन को लेकर वन विभाग के प्रतिबंधों से त्रस्त हैं. ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं, तब तक वोट नहीं.

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तामिलनाडु के दो गांवों ने चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया है. (एएनआई)

चेन्नई: तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है, लेकिन चुनावी सरगर्मी के बीच जमीनी हकीकत की एक बेहद कड़वी तस्वीर सामने आई है. बड़े-बड़े चुनावी वादों से इतर राज्य के कुछ गांवों ने नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बुनियादी सुविधाओं और आजीविका के लिए दशकों से संघर्ष कर रहे ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि इस बार वे किसी भी दल को वोट नहीं देंगे, बल्कि चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करेंगे या NOTA का बटन दबाएंगे.

16 साल का वनवास: नंदावनम गांव में न बिजली, न पानी

तिरुचिरापल्ली (Trichy) जिले के नंदावनम इलाके की स्थिति विकास के खोखले दावों की पोल खोलती है. यहां करीब 50 से अधिक परिवार पिछले 16 सालों से बिना बिजली, पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के जीवन यापन कर रहे हैं. प्रशासन के चक्कर काट-काटकर थक चुके इन ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है. सालों की अनदेखी से नाराज पूरे गांव ने एक सुर में आगामी विधानसभा चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है.

अज्जूर गांव: आजीविका पर वन विभाग का पहरा

दूसरी ओर, नीलगिरि जिले के खूबसूरत पहाड़ी इलाके में स्थित ऊटी (Udhagamandalam) के अज्जूर गांव का भी यही हाल है. यहां पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समुदाय पिछले 10 सालों से अपनी जमीन और रोजी-रोटी को लेकर वन विभाग से संघर्ष कर रहे हैं.

क्या है विवाद: वन विभाग ने अज्जूर गांव के आसपास की करीब 300 एकड़ जमीन को ‘संरक्षित वन भूमि’ घोषित कर दिया है, जबकि इसमें से 93 एकड़ जमीन पर ग्रामीणों के घर और चरागाह हैं.

रोजी-रोटी का संकट: गांव के लगभग 300 परिवार चरागाह की छोटी सी जगह पर चाय के पौधे उगाकर अपना गुजारा करते हैं. ग्रामीण रविकुमार के अनुसार, वन अधिकारियों की पाबंदियों के कारण वे जंगल से पत्तियां और सूखी लकड़ियां भी नहीं ला पा रहे हैं, जो उनकी आय का मुख्य साधन है.

सिर्फ NOTA को वोट: मुख्यमंत्री कार्यालय सहित कई जगह याचिकाएं देने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला. इससे नाराज गांव के करीब 800 मतदाताओं ने पंचायत में फैसला लिया है कि अगर चुनाव से पहले स्थायी समाधान नहीं मिला, तो वे सामूहिक रूप से NOTA का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे.

तमिलनाडु का चुनावी समीकरण

तमिलनाडु में एक ही चरण में 23 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे. इस बार राज्य में मुख्य रूप से त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है:

  1. एसपीए गठबंधन: डीएमके के नेतृत्व वाले इस धड़े में कांग्रेस, वीसीके और डीएमडीके शामिल हैं.
  2. एनडीए गठबंधन: एआईडीएमके के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में बीजेपी और पीएमके शामिल हैं.
  3. नई एंट्री: मशहूर अभिनेता ‘थलपति विजय’ अपनी नई पार्टी (TVK) के साथ पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं.

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Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें



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