Jaipur Mata Dungri Mandir: मोती डूंगरी मंदिर में एक अनोखी और 42 साल पुरानी परंपरा आज भी निभाई जा रही है, जिसमें पंचामृत अभिषेक से तैयार विशेष च्यवनप्राश भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. यह च्यवनप्राश करीब 35 प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बनाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. मंदिर में यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि आयुर्वेदिक ज्ञान का भी प्रतीक है. भक्त इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर खुद को धन्य महसूस करते हैं. यह परंपरा जयपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाती है, जहां भक्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष प्रसाद को पाने के लिए मंदिर पहुंचते हैं.





