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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध में पाकिस्तान ‘शांति दूत’ और बिचौलिया बनने का सपना देख रहा है. इस पर रक्षा विशेषज्ञ मेजर गौरव आर्या ने पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख असीम मुनीर की पोल खोल दी है. मेजर आर्या ने पाकिस्तान को ‘देश नहीं, बल्कि सिर्फ एक चुंगी नाका’ करार दिया है, जो दुनिया में केवल अपनी कमीशन ढूंढ रहा है.
तेहरान के मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इजरायल का निशाना. (AP)
अमेरिका-ईरान जंग के बीच एक ऐसा देश शांति दूत बनने का सपना देख रहा है, जिसके अपने घर में खाने के लाले पड़े हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान की. पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है और पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश कर रहा है. पाकिस्तान दुनिया का नया ‘स्विट्जरलैंड’ बनने का ढोंग रच रहा है. लेकिन क्या उस पाकिस्तान की कोई हैसियत है जिसकी अर्थव्यवस्था आईएमएफ की भीख पर टिकी है? मेजर गौरव आर्या ने पाकिस्तान की इस कूटनीतिक नौटंकी की धज्जियां उड़ाते हुए उसकी पूरी कुंडली खोल कर रख दी है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान देश नहीं, सिर्फ एक नाका चुंगी है.
मेजर गौरव आर्या ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश पर करारा प्रहार करते हुए इसे सदी का सबसे बड़ा मजाक बताया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, पाकिस्तान के अंदर पीएसएल (PSL) क्रिकेट टूर्नामेंट हो रहा है. जो टूर्नामेंट छह जगहों पर होना था, वो डर के मारे सिर्फ दो जगह सिमट गया. ये लोग खौफ के कारण अपनी 23 मार्च की सबसे बड़ी राष्ट्रीय परेड नहीं करवा पा रहे हैं. जो देश एक टी-20 मैच सुरक्षित तरीके से नहीं करवा पा रहा, वो अमेरिका और ईरान के बीच विश्व शांति का समझौता कैसे करवा सकता है?
पाकिस्तान का डबल गेम
आखिर पाकिस्तान इस आग में हाथ क्यों डाल रहा है? मेजर आर्या ने इसका कच्चा चिट्ठा खोलते हुए बताया कि पाकिस्तान का मकसद सिर्फ अपनी जेब भरना है. पाकिस्तान की हालत उस चुंगी नाके जैसी हो गई है, जहां लोग पैसा देकर गुजरते हैं. पाकिस्तान सोच रहा है कि उसे दोनों तरफ से मलाई मिलेगी, अमेरिका से डॉलर और हथियार मिलेंगे, और ईरान से तेल. मेजर ने खुलासा किया कि पाकिस्तान जो तेल ईरान से ले रहा है, वो कोई आधिकारिक व्यापार नहीं है, बल्कि बलूचिस्तान के रास्ते आने वाला 19% स्मगल (तस्करी) किया हुआ तेल है, जिसमें पाकिस्तानी फौज और स्मगलर सीधे तौर पर शामिल हैं.
सऊदी अरब से गद्दारी और चीन के कबाड़ हथियार
पाकिस्तान खुद को इस्लामी दुनिया का लीडर साबित करने की होड़ में लगा है, लेकिन उसकी असलियत गद्दारी की है. मेजर आर्या ने बताया कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट साइन किया था, लेकिन जब ईरान ने सऊदी और अन्य मुस्लिम देशों पर मिसाइलें दागीं, तो पाकिस्तान चुपचाप बैठ गया. इसके अलावा, पाकिस्तान अमेरिका से हथियारों की भीख मांगता है, लेकिन उसके 80% हथियार चीन के हैं. चीन के ये कबाड़ हथियार वेनेजुएला से लेकर ईरान और पाकिस्तान तक हर जगह फ्लॉप साबित हुए हैं. मेजर आर्या ने साफ कहा कि कूटनीति में सबसे बड़ी चीज होती है क्रेडिबिलिटी , और पाकिस्तान के पास यह शून्य है. भारत की तरह अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाने का सपना देख रहा पाकिस्तान भूल गया है कि “सम्मान और पाकिस्तान, दोनों एक दूसरे के घोर विरोधी शब्द हैं.
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