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कृषि विशेषज्ञ वकील यादव बताते हैं कि झारखंड में इन दिनों पपीते की ‘रेड लेडी’ और ‘पूसा नन्हा’ किस्म की खेती अधिक की जा रही है. इनमें ‘रेड लेडी’ किस्म ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें फल अधिक आते हैं. साथ ही, मेल पौधे कम निकलते हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होता है.
देवघर: भारत में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. पहले जहां किसान गेहूं, धान और दाल जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब वे अधिक मुनाफे के लिए नई फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. बदलते समय के साथ किसानों ने खेती में विविधता को अपनाना शुरू कर दिया है, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है.
पपीते की खेती हो रही तेजी से लोकप्रिय
इसी कड़ी में पपीते की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है और उन्नत किस्मों के कारण किसानों को कम समय में अधिक उत्पादन मिल रहा है. यही वजह है कि हाल के दिनों में पपीते की खेती को लेकर किसानों में उत्साह बढ़ा है.
‘रेड लेडी’ किस्म ज्यादा लोकप्रिय
कृषि विशेषज्ञ वकील यादव बताते हैं कि झारखंड में इन दिनों पपीते की ‘रेड लेडी’ और ‘पूसा नन्हा’ किस्म की खेती अधिक की जा रही है. इनमें ‘रेड लेडी’ किस्म ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें फल अधिक आते हैं. साथ ही, मेल पौधे कम निकलते हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होता है. हालांकि, इसमें कीटों का खतरा थोड़ा ज्यादा रहता है, लेकिन सही देखभाल और समय पर कीटनाशक के इस्तेमाल से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है.
एक कट्ठा जमीन में करीब 40 पौधे
खेती के तरीके की बात करें तो एक कट्ठा जमीन में करीब 40 पौधे लगाए जा सकते हैं. इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का चयन जरूरी है. रोपाई से पहले गड्ढे तैयार कर लेने से पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है.
रोपाई के लगभग 6 महीने बाद ही फल
खर्च के लिहाज से भी यह खेती ज्यादा महंगी नहीं है. एक पौधा करीब 15 रुपये में मिल जाता है और रोपाई के लगभग 6 महीने बाद ही फल आना शुरू हो जाता है. इससे किसानों को जल्दी आमदनी मिलने लगती है. कुल मिलाकर, सही तकनीक और देखभाल के साथ ‘रेड लेडी’ पपीते की खेती किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प साबित हो रही है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें




