Period leave for Women Dispute: कामकाजी महिलाओं को अनिवार्य पीरियड लीव पर विवाद बढ़ता जा रहा है. एक तरफ कर्नाटक सरकार ने महिलाओं को हर महीने एक पेड पीरियड लीव देने का आदेश जारी किया है, वहीं अब इस आदेश के खिलाफ प्राइवेट कंपनियों में ऊंचे पदों पर तैनात 15 महिलाएं कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गई हैं.
बेंगलुरु की अलग-अलग प्राइवेट कंपनियों में मैनेजर पद पर काम करने वाली 15 महिलाओं के एक समूह ने 23 मार्च को कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने उन्होंने राज्य सरकार के मासिक धर्म (पीरियड) छुट्टी वाले आदेश को रद्द करने की मांग की है.
बता दें कि कर्नाटक सरकार ने 20 नवंबर 2025 को हर महीने एक दिन की पेड (सवेतन) पीरियड लीव देने का आदेश जारी किया था जो सरकारी और प्राइवेट सहित सभी सैक्टरों पर लागू किया गया था.
हाईकोर्ट में क्या बोलीं महिलाएं
हाईकोर्ट को दिए अपने तर्क में याचिकाकर्ता महिलाओं ने कहा कि पुरुषों और महिलाओं के बीच इस तरह का अलग नियम बनाना कार्यस्थल पर समानता (इक्वालिटी) लाने के उद्देश्य से जुड़ा नहीं है. राज्य सरकार की ओर से इस तरह की अनिवार्य छुट्टी लागू करने से महिलाओं को नौकरी देने में भेदभाव बढ़ सकता है, क्योंकि नियोक्ता (एम्प्लॉयर) उन्हें पुरुषों से कम सक्षम समझ सकते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करता है, जो चाहे पुरुष हो या महिला, सभी को समानता का अधिकार देता है. उनके अनुसार, यह नीति समानता बढ़ाने के बजाय महिलाओं को कमजोर दिखाने वाली सोच को बढ़ावा देती है.
भलाई के नाम पर भेदभाव
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह भलाई के नाम पर भेदभाव (benevolent sexism) की नीति है. यह महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनके प्रति पुराने और संरक्षणवादी (पितृसत्तात्मक) नजरिए को मजबूत करती है.
ज्यादा छुट्टी लेने वाली समझेंगे लोग
उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनकी जैविक प्रक्रिया के आधार पर अलग दिखाने से उन्हें कम उत्पादक या ज्यादा छुट्टी लेने वाली समझा जा सकता है. इससे नौकरी बाजार में उनकी छवि खराब हो सकती है और उनके समान अवसर के अधिकार पर असर पड़ सकता है.
बता दें कि यह मामला जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े के सामने पेश हुआ था जो पहले से ही इस सरकारी आदेश के खिलाफ नियोक्ता संगठनों की याचिकाओं की सुनवाई कर रहे हैं. अब इस पर कोर्ट के आदेश का इंतजार है.
क्या था आदेश और किसने दिया?
कर्नाटक सरकार ने राज्य में कामकाजी सभी महिलाओं को महीने में एक दिन की पीरियड लीव देने का आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया कि हर महिला को इसके लिए उस दिन की सैलरी भी मिलेगी.
क्या है विवाद?
सरकार द्वारा लागू किए गए महिलाओं को हर महीने पेड लीव देने के इस आदेश को लेकर कई कंपनियां कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंची थीं और इस नियम को हटाने की मांग की थी. वहीं अब कामकाजी महिलाओं ने भी आदेश के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और इस नियम को हटाने की मांग की है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट में पूरे देशभर की महिलाओं को पेड लीव दिए जाने की मांग की याचिका को चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि अनिवार्य पीरियड लीव से नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं, जिससे उनके करियर और रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.





