पीलीभीत का कल्याणपुर चक्रतीर्थ, जहां के कुंड में स्नान से धुल जाते हैं सारे पाप, महाभारत काल से है नाता

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पीलीभीत में स्थित कल्याणपुर चक्रतीर्थ का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थल का सीधा संबंध महाभारत काल से है. जनश्रुतियों के मुताबिक, पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहाँ व्यतीत किया था. इस पावन स्थल की महत्ता इतनी अधिक है कि यहाँ के सरोवर में स्नान करने को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है. कहा जाता है कि जो भी श्रद्धालु यहाँ पूरी श्रद्धा के साथ आता है, उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है.

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पीलीभीतः उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में स्थित कल्याणपुर चक्रतीर्थ का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थल का सीधा संबंध महाभारत काल से है. जनश्रुतियों के मुताबिक, पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहाँ व्यतीत किया था. इस पावन स्थल की महत्ता इतनी अधिक है कि यहाँ के सरोवर में स्नान करने को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है. कहा जाता है कि जो भी श्रद्धालु यहाँ पूरी श्रद्धा के साथ आता है, उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है.

अश्वत्थामा का यहां से है नाता

स्थानीय मान्यताओं और बुजुर्गों के अनुसार, महाभारत के प्रमुख पात्र अश्वत्थामा का संबंध इस क्षेत्र से बहुत गहरा है. माना जाता है कि वे आज भी इस क्षेत्र में अदृश्य रूप में भ्रमण करते हैं. यहाँ स्थित प्राचीन शिवलिंग के बारे में यह प्रचलित है कि अश्वत्थामा स्वयं यहाँ आकर पूजा-अर्चना करते हैं. इस स्थान पर एक अत्यंत प्राचीन कुंड भी मौजूद है, जिसके जल को गंगाजल के समान पवित्र माना जाता है. श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से की गई पूजा और पवित्र सरोवर में एक डुबकी लगाने से व्यक्ति को दैहिक, दैविक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है.

यहां लगता है विशाल मेला

कल्याणपुर चक्रतीर्थ केवल स्थानीय निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य जनपदों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष श्रद्धा का केंद्र है. प्रत्येक वर्ष यहाँ विशेष पर्वों और मुख्य अवसरों पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है. इन मेलों में बड़ी संख्या में भक्त अपनी मन्नतें लेकर पहुँचते हैं और सरोवर के तट पर पूजन करते हैं इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल बनाती है. शासन और प्रशासन के स्तर पर भी इस प्राचीन तीर्थ के सुंदरीकरण और विकास को लेकर समय-समय पर योजनाएं बनाई जाती रही हैं. स्थानीय लोगों की मांग रहती है कि इस पौराणिक विरासत को बेहतर ढंग से संरक्षित किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी गौरवशाली संस्कृति से परिचित हो सकें. यहाँ की शांति और पौराणिक ऊर्जा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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