पूर्णेंदु तिवारी को कतर कोर्ट ने माना निर्दोष, फिर भी पूर्व नेवी कमांडर जेल में क्यों? परिवार में PM से मांगी मदद

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कतर कोर्ट ने माना पूर्णेंदु तिवारी को निर्दोष, फिर भी रिहाई पर सस्पेंस

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कतर हाईकोर्ट ने भारतीय नौसेना के पूर्व पूर्णेंदु तिवारी को वित्तीय धोखाधड़ी से बरी किया, फिर भी वे दोहा की जेल में बंद हैं. परिवार ने पीएम मोदी और विदेश मंत्रालय से मदद मांगी है. परिवार ने भारतीय अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द उनकी वापसी सुनिश्चित करें.

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पूर्णेंदु तिवारी की रिहाई के लिए परविरा ने भारत सरकार से मदद मांगी है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. कतर से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है. भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को कतर के हाईकोर्ट ने वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में पूरी तरह बरी कर दिया है. लेकिन सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि निर्दोष साबित होने के बावजूद उन्हें अभी भी जेल में ही रखा गया है. तिवारी उन 8 पूर्व नौसैनिकों में शामिल हैं जिन्हें पहले दोहा में जासूसी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार किया गया था. अब कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद भी रिहाई न होने से उनका परिवार गहरे सदमे में है. परिवार ने पूर्णेंदु तिवारी की सुरक्षित वतन वापसी के लिए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है.

कतर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्णेंदु तिवारी बरी
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर की हाईकोर्ट ने 12 मार्च को पूर्व नेवी कमांडर के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने आरोपी द्वारा दायर की गई अपील (नंबर 1508/2026) को स्वीकार कर लिया. अदालत ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए तिवारी को वित्तीय गड़बड़ी के सभी आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है.

‘लेन-देन में कोई आपराधिक नीयत नहीं थी’
अदालत के दस्तावेजों से एक बड़ी बात सामने आई है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि पैसों का जो भी लेन-देन हुआ था, वह शिकायतकर्ता की पूरी सहमति से ही किया गया था. इस पूरे मामले में पूर्णेंदु तिवारी की कोई भी ‘क्रिमिनल इंटेंट’ (आपराधिक नीयत) नहीं पाई गई. इसी आधार पर उन्हें निर्दोष करार दिया गया.

बेगुनाह होकर भी जेल में, परिवार ने मांगी मदद
बरी होने के बाद भी कमांडर तिवारी दोहा की जेल में बंद हैं; यह शहर इस समय ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की मार झेल रहा है. उनके परिवार ने बताया कि अदालत के फ़ैसले के बावजूद, उन्हें अभी भी लंबी कानूनी और हिरासत से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों के कारण MEA ने उन्हें “पीछे छोड़ दिया” और तब से उन्हें एक लंबे और कठिन दौर से गुज़रना पड़ा है, जिसमें उनकी बिगड़ती सेहत भी शामिल है. परिवार ने भारतीय अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द उनकी वापसी सुनिश्चित करें, और इसके लिए उन्होंने हिरासत में रहने के दौरान उनकी लगातार बिगड़ती मेडिकल हालत का हवाला दिया है.



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