टूर्नामेंट के शुरुआती 12–13 मैचों में साफ दिखा कि युवा खिलाड़ियों का दबदबा बढ़ा है. 15–16 साल के वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज़ को उभरता हुआ बड़ा ब्रांड माना जा रहा है, जबकि यशस्वी जायसवाल जैसे फियरलेस बल्लेबाज़ जसप्रीत बुमराह जैसे वर्ल्ड-क्लास गेंदबाज़ को पहली ही गेंद पर छक्का मारकर यह संदेश दे रहे हैं कि अब खेल नाम से नहीं, सिर्फ गेंद से खेला जाता है. अगर बुमराह, दीपक चाहर या संदीप शर्मा जैसे गेंदबाज़ लाइन-लेंथ में चूकते हैं, तो यशस्वी जैसे बल्लेबाज़ उनके पूरे प्लान को बिगाड़ देते हैं.


