बाड़मेर के कृषि कॉलेजों का सच: 3 साल से बिना फैकल्टी, बिना क्लास चल रही पढ़ाई, छात्रों का भविष्य अधर में

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Ground Report : बाड़मेर में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के बड़े दावे अब सवालों के घेरे में हैं. तीन साल पहले शुरू किए गए कृषि कॉलेज आज भी बिना स्थायी फैकल्टी के संचालित हो रहे हैं. न नियमित कक्षाएं लग रही हैं और न ही विषय विशेषज्ञ मौजूद हैं. ऐसे में सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

बाड़मेर : राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए गए लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. सरहदी बाड़मेर जिला मुख्यालय के साथ साथ बाटाडू और गुड़ामालानी में खोले गए कृषि कॉलेज पिछले 3 साल से बिना स्थायी फैकल्टी के ही संचालित हो रहे हैं. यहां न प्रोफेसर हैं और न ही व्याख्यात… ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर छात्रों को पढ़ा कौन रहा है और उनके भविष्य की जिम्मेदारी किसके कंधों पर है?

राज्य सरकार ने किसानों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर बेहतर कृषि शिक्षा देने के उद्देश्य से बाड़मेर, बाटाडू और गुड़ामालानी में कृषि कॉलेज की शुरूआत की थी. शुरुआत में इसे पश्चिम राजस्थान के लिए बड़ी सौगात माना गया था लेकिन समय बीतने के साथ ये कॉलेज खुद एक बड़ी समस्या बन गए हैं. अब आलम यह है कि बाटाडू के अलावा कही पर भी यह कॉलेज शुरू नही हो पाए है.

कृषि कॉलेज खुले, 3 साल बाद भी फैकल्टी नहीं
साल 2022 में कृषि महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गई थी. 3 साल बीत जाने के बावजूद इन कॉलेजों में स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हो पाई है. आलम यह है कि कॉलेजों में न तो विषय विशेषज्ञ उपलब्ध हैं और न ही नियमित कक्षाएं लग पा रही हैं. कई बार गेस्ट फैकल्टी या अस्थायी शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई करवाई जाती है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है. अक्टूबर 2025 में इन कॉलेजों के उद्घाटन हो गया है लेकिन आज दिन तक नोडल कॉलेजों ने इसका हैंडओवर नही लिया है.

47 कृषि कॉलेज खुले, पर फैकल्टी का अता पता नहीं
साल 2022 में 47 कृषि कॉलेज खोले हैं लेकिन हाल यह है कि किसी कॉलेज में स्वीकृत पदों पर फैकल्टी के व्याख्याता नहीं है. वजह ये है कि कॉलेज शिक्षा के अधीन इन कृषि कॉलेज को शुरू तो कर दिया गया लेकिन यहां स्थाई नौकरी नहीं है. विद्या संबल योजना के तहत प्रति घंटा मानदेय दिया जाता है. कई बार भर्ती निकाली गई लेकिन कोई आवेदन ही नहीं कर रहा है ऐसे में वर्तमान में सभी कॉलेज नोडल कॉलेजों के अधीन व्यवस्था के तौर पर संचालित हो रहे हैं जहां फैकल्टी का कोई व्याख्याता नहीं है.

स्टाफ नहीं, 150 छात्र बिना पढ़ाई दे रहे एग्जाम
प्रत्येक कृषि कॉलेज में 1 प्रिंसीपल, 10 सहायक आचार्य, 2 सह आचार्य, 12 मंत्रालयिक कर्मचारी, 1 लाइब्रेरियन, 1 निजी सहायक और 1 सहायक लेखाधिकारी का पद स्वीकृत है लेकिन कहीं भी इन पदों पर स्थाई नियुक्ति नहीं है. बाड़मेर कृषि महाविद्यालय का नोडल कॉलेज बाड़मेर पीजी कॉलेज है. बाड़मेर कृषि महाविद्यालय में करीब 150 स्टूडेंट है जो बिना पढ़ाई के हर साल एग्जाम दे रहे हैं. कृषि कॉलेज की बिल्डिंग गेंहू रोड़ पर बन रही है. जून 2024 तक बिल्डिंग का काम पूरा होना था लेकिन अभी तक काम चल रहा है. अक्टूबर 2025 में इन कॉलेजों के उद्घाटन भी कर दिया गया लेकिन आज भी इनका हैंडओवर नही लिया गया है.

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Rupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at News18 India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें



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