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बिना केमिकल का जादू! कन्नौज का इत्र क्यों है देश-विदेश में इतना फेमस, जानिए खासियत

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कन्नौज, उत्तर प्रदेश का वह शहर है जो अपनी पारंपरिक इत्र निर्माण कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां तैयार होने वाला गुलाब इत्र देग-भाप तकनीक से बिना किसी केमिकल के बनाया जाता है, जिसकी प्राकृतिक खुशबू और शुद्धता इसे खास बनाती है.

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कन्नौज. उत्तर प्रदेश का कन्नौज अपनी पारंपरिक इत्र निर्माण कला के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां गुलाब के फूलों से तैयार किया जाने वाला गुलाब इत्र अपनी भीनी-भीनी खुशबू और प्राकृतिक गुणों के कारण खास पहचान रखता है. सदियों पुरानी देग-भाप तकनीक से बनने वाला यह इत्र पूरी तरह प्राकृतिक होता है, जिसमें किसी भी प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. यही कारण है कि इसकी शुद्धता और गुणवत्ता बरकरार रहती है और लोगों का विश्वास भी इस पर कायम है.

पारंपरिक तकनीक से होता है निर्माण
कन्नौज में इत्र बनाने की प्रक्रिया आज भी पारंपरिक तरीकों से की जाती है. इसमें तांबे के बर्तनों में गुलाब के फूलों को पानी के साथ उबालकर उसकी भाप को इकट्ठा किया जाता है. इस भाप को विशेष प्रक्रिया के जरिए तेल में बदला जाता है, जिससे शुद्ध इत्र तैयार होता है. यह प्रक्रिया न केवल समयसाध्य होती है बल्कि इसमें कुशल कारीगरों की भी अहम भूमिका होती है, जो पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं.

सिर्फ खुशबू ही नहीं, कई उपयोग भी
गुलाब इत्र का उपयोग केवल परफ्यूम के रूप में ही सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ, आयुर्वेदिक उपचार, स्किन केयर और मिठाइयों में खुशबू बढ़ाने के लिए भी किया जाता है. आयुर्वेद में इसे शरीर को ठंडक पहुंचाने और मानसिक तनाव कम करने में सहायक माना जाता है. खासकर गर्मियों के मौसम में इसकी मांग और बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर और मन दोनों को तरोताजा रखने में मदद करता है.

देश-विदेश में बढ़ रही मांग
कन्नौज का गुलाब इत्र अब सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुका है. इसकी प्राकृतिक खुशबू और बिना केमिकल के निर्माण की वजह से विदेशी बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. कई बड़े ब्रांड भी अब कन्नौज के इत्र को अपने उत्पादों में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को भी रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं.

क्या बोले इत्र व्यापारी
इत्र व्यापारी निशीष तिवारी बताते हैं कि कन्नौज के कारीगरों ने अपनी मेहनत और कौशल से इस पारंपरिक कला को आज तक जीवित रखा है. आधुनिक तकनीक के दौर में भी यह कला अपनी मूल पहचान बनाए हुए है, जरूरत है कि सरकार और समाज मिलकर इन कारीगरों को प्रोत्साहित करें, ताकि कन्नौज का यह अनमोल इत्र उद्योग आने वाली पीढ़ियों तक यूं ही महकता रहे.

About the Author

Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें



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