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Bikaner ka Moth : बीकानेर का मशहूर मोठ अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है. GI टैग की प्रक्रिया तेज होने के साथ इसे ग्लोबल ब्रांड बनाने की तैयारी है. इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि बीकानेरी भुजिया को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिलेगी. प्रोसेसिंग यूनिट और ऑर्गेनिक प्रमोशन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा होगा.
बीकानेर : राजस्थान के बीकानेर जिले की पहचान केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की कृषि उपज भी पूरे देश में खास स्थान रखती है. खासकर मोठ, जो इस क्षेत्र की प्रमुख फसल है, अब नई पहचान की ओर बढ़ रही है. हाल ही में आयोजित “पंच गौरव” समीक्षा बैठक में कृषि विपणन विभाग ने जानकारी दी कि मोठ को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद बीकानेर का मोठ एक ब्रांड के रूप में उभरेगा, जिससे निर्यात के रास्ते खुलेंगे और किसानों की आय में वृद्धि होगी. साथ ही, प्रोसेसिंग यूनिट और ऑर्गेनिक प्रमोशन से बीकानेर की भुजिया को भी नया बाजार मिलेगा.
बीकानेर का मोठ: स्वाद और गुणवत्ता की पहचान
बीकानेर की जलवायु और रेतीली भूमि मोठ की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है. यहां मुख्यतः बारानी (वर्षा आधारित) क्षेत्रों में मोठ की पैदावार होती है, जहां रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है. यही कारण है कि यहां का मोठ स्वाद और गुणवत्ता दोनों में अलग पहचान रखता है. इस विशेषता को देखते हुए इसे ऑर्गेनिक उत्पाद के रूप में भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है.
मोठ से बढ़ेगी बीकानेरी भुजिया की ब्रांड वैल्यू
मोठ की सबसे बड़ी पहचान बीकानेर की विश्वप्रसिद्ध भुजिया से जुड़ी हुई है. बीकानेरी भुजिया का स्वाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों को आकर्षित करता है, और इसकी मुख्य सामग्री में मोठ का आटा प्रमुख होता है. यदि मोठ को जीआई टैग मिल जाता है, तो इससे बीकानेरी भुजिया को भी वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी, साथ ही स्थानीय उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी.
‘एक जिला-एक उत्पाद’ में मोठ को प्राथमिकता
समीक्षा बैठक के दौरान प्रभारी सचिव देबाशीष पृष्टि ने “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत मोठ को प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बीकानेर की आबोहवा में पैदा होने वाला मोठ न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि इसकी गुणवत्ता भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है. ऐसे में इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए.
मोठ प्रोसेसिंग यूनिट से बढ़ेगा रोजगार
इसके अलावा, बैठक में करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से मोठ प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया. इस पर राज्य स्तर पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया गया है. यदि यह यूनिट स्थापित होती है, तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी. इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
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