भारतीय सेना के पास होगा ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’, फुस्‍स कर देगा पाकिस्‍तान-तुर्की के ड्रोन-मिसाइल, फिर होगा ‘तांडव’

Date:


Indian Army: पाकिस्‍तान और तुर्की मिलकर अब कितनी भी साजिश रच लें, पर भारतीय सेना के नए इंतजाम के सामने उन्‍हें मुंह की ही खानी पड़ेगी. जी हां, भारतीय सेना ने भविष्‍य की चुनौतियों को ध्‍यान में रखते हुए नए सिरे से अपनी सीमाओं और तैयारियों को चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में भारतीय सेना को जल्‍द एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ मिलने जा रहा है, जो पाकिस्‍तानी सेना की हर मिसाइल और ड्रोन को न केवल फुस्‍की बम बना देगा, बल्कि दुश्‍मन के हर मंसूबे को जमींदोज करने में सक्षम होगा.

दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्‍मन ने पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय ठिकानों को निशाना बनाने के लिए खास तरह के ड्रोन और स्वार्म टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था. इन ड्रोन का इस्‍तेमाल सर्विलांस और प्रिसिजन स्‍ट्राइक के लिए किया गया था. भारतीय सेना ने भविष्‍य की चुनौतियों से निपटने के लिए अगली पीढ़ी का एयर डिफेंस गन सिस्टम (ADG-NG) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने ‘रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन’ (आरएफआई) जारी किया है.

भविष्‍य की चुनौतियों के लिए पर्याप्‍त नहीं मौजूदा एयर डिफेंस सिस्‍टम

  1. भारतीय सेना का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और छोटे-छोटे स्वार्म हमले निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. ऐसे में पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम अब पर्याप्त नहीं रह गए हैं.
  2. आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती लो-सिग्नेचर वाले टारगेट हैं. आकार में बेहद छोटे इलेक्ट्रिक ड्रोन ट्रेडिशनल रडार और इंफ्रारेड सिस्टम से आसानी से बचकर निकल जातेहैं.
  3. ऐसे में भारतीय सेना को अब ऐसे सिस्टम की जरूरत है, जो न केवल इन छोटे इलेक्ट्रिक ड्रोन का पता लगा सके, बल्कि उन्हें तुरंत खत्‍म भी कर सके.
  4. अगली पीढ़ी की एयर डिफेंस गन (एडीजी-एनजी) सिस्टम इसी चुनौतियों को ध्‍यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. यह सिस्टम शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस में मौजूद चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगा.
  5. नई एयर डिफेंस गन को आसानी से किसी भी मोर्चे पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह मोबाइल बनाया जाएगा. जरूर पड़ने पर इसे किसी वाहन पर भी लगाया जा सकेगा और टो करके भी ले जा या जा सकेगा.
  6. इसके साथ एक एडवांस्ड ‘इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम’ भी होगा, जिसकी मदद से यह सिस्‍टम
    न केवल दिन और रात में काम करेगा, बल्कि किसी भी मौसम में खुद ही टारगेट को पहचान कर उसे बर्बाद कर सकेगा.
  7. एडीजी-एनजी और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम की ज्‍वाइंट टेक्‍नोलॉजी पूरी तरह से ऑटोमैटिक होगी. यानी इसके इस्‍तेमाल में ऑपरेटर की भूमिका बेहद सीमित रह जाएगी.

कितने तरह की चुनौतियों के एक साथ निपटने में सक्षम होगी नेक्‍स्‍ट जनरेशन की नई एयर डिफेंस गन?
डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, एडीजी-एनजी का रोल सिर्फ ड्रोन को खत्‍म करने तक सीमित नहीं रहेगा. इसे फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, क्रूज मिसाइल, प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन, रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार (URAM) जैसे खतरों से निपटने के लिए भी तैयार किया जा रहा है. इतना ही नहीं, भारत का नया ब्रह्मास्त्र माइक्रो-लाइट एयरक्राफ्ट, पैरा-मोटर्स और पैराग्लाइडर्स खतरों से भी आसानी से निपट सकेगा.

नई एडीजी-एनजी की फायरिंग क्षमता कितनी होगी और कितनी दूरी तक मौजूद टार्गेट को बर्बाद कर सकती है?
डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने इस सिस्टम के लिए कड़े तकनीकी मानक तय किए हैं. गन की न्यूनतम मारक क्षमता 4 किलोमीटर होगी. यह 500 मीटर प्रति सेकंड की स्‍पीड से उड़ने वाले टार्गेट को निशाना बना सकेगी. इसके अलावा, इसकी फायरिंग स्‍पीड कम से कम 300 राउंड प्रति मिनट होगी. यह 2.5 किमी या उससे अधिक ऊंचाई तक के टारगेट को हिट करने में सक्षम होना चाहिए.

प्री-फ्रैगमेंटेड और प्रॉक्सिमिटी फ्यूज क्‍या है और यह इस सिस्टम को कैसे बेहतर बनाएगी?
डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, इस सिस्‍टम के साथ इस्तेमाल होने वाले एम्‍युनिशन को भी स्‍मार्ट बनाने की तैयारी है. इस सिस्‍टम के लिए भारतीय सेना ने प्रोग्रामेबल स्मार्ट राउंड्स की मांग की है, जिनमें प्री-फ्रैगमेंटेड और प्रॉक्सिमिटी फ्यूज जैसी तकनीक होगी. इसके अलावा, इसमें ट्रेडिशनल हाई-एक्सप्लोसिव राउंड्स भी शामिल होंगे. सुरक्षा के लिहाज से हर एम्‍युनिशन में सेल्फ-डिस्ट्रक्ट मैकेनिज्म होगा, ताकि अगर वह टार्गेट को खत्‍म नहीं कर पाए तो वह खुद ही नष्ट हो जाए. इसके अलावा, इन एम्‍युनिशन की न्यूनतम शेल्फ लाइफ 10 साल तय की गई है.

क्‍या यह सिस्‍टम सेल्‍फ ऑपरेटिव होगा, या फिर इसको ऑपरेट करने के लिए ऑपरेटर की जरूरत होगी?
डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, नई गन सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि इसे अधिकतम दो लोग ही ऑपरेट कर सकें. इसमें ऑटो-लोडर की फैस‍िलिटी होगी, जिससे एम्‍युनिशन भरने के प्रॉसेस को तेज और आसान बनाया जा सके. इसके साथ ही इसमें कई तरह के पावर ऑप्शन होंगे, जिसमें ऑनबोर्ड जनरेटर, बैटरी और मेन्स सप्लाई शामिल हैं. खास बात यह है कि इसमें साइलेंट ऑपरेशन का विकल्प भी होगा, जिससे दुश्मन को इसकी मौजूदगी का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा.

क्‍या यह ए‍डीजी-एनएस भारत में तैयार किया जाएगा या फिर इसे विदेश से मंगाने की तैयारी की जा रही है?
डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, इस प्रोजेक्‍ट को आत्मनिर्भर भारत मिशन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि इस सिस्टम में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होना चाहिए. इसके अलावा, इस गन को बनाने में मदद करने वाली विदेशी कंपनियों को टेक्‍नोलॉजी भी ट्रांसफर करनी होगी, ताकि भारत भविष्य में खुद ऐसे सिस्टम बनाने में सक्षम हो सके.

क्‍या भविष्य में एडीजी-एनजी के साथ नई टेक्‍नोलॉजी भी जोड़ी जा सकेगी?
डिफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, एडीजी-एनजी को मॉड्यूलर बनाया जाएगा, ताकि समय के साथ इसमें नई टेक्‍नोलॉजी जोड़ी जा सकेगी. इसे मौजूदा रडार और नेविगेशन सिस्टम के साथ आसानी से जोड़ा जा सकेगा. आरएफआई में यह भी कहा गया है कि सिस्टम को डीजेआई मैविक प्रो-3 जैसे छोटे कमर्शियल ड्रोन से लेकर आधुनिक फाइटर जेट तक की पहचान और ट्रैकिंग करने में क्षमता होनी चाहिए.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related