भूले-भटके, अटके, टूटे शब्द… केरल रैली में राहुल की मलयालम बोलने की ‘कोशिश’ फ्लॉप! पीएम मोदी की लोकल भाषा स्टाइल का कोई मुकाबला नहीं!

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राहुल की मलयालम बोलने की ‘कोशिश’ फेल! पीएम मोदी की हर बार कर जाते हैं टॉप!

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आप सबने देखा होगा कि पीएम मोदी जहां भी रैली या जनसभा करने जाते हैं, वहां की स्थानीय भाषा में इतने सहज बोलते हैं कि लोग तालियां बजाते नहीं थकते. वहीं दूसरी तरफ 2026 के केरल विधानसभा चुनाव से पहले एक क्लिप वायरल हो रही है. जिसमें राहुल गांधी मलायालम भाषा में कुछ शब्द बोल रहे हैं, लेकिन अटक रहे हैं. जानते हैं पूरी कहानी.

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राजनीति में भाषण सिर्फ शब्दों का खेल नहीं होता, बल्कि जनता से जुड़ने का जरिया भी होता है. खासकर जब नेता किसी दूसरे राज्य में जाते हैं, तो वहां की स्थानीय भाषा में कुछ शब्द बोलने की कोशिश करते हैं. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है, जिसमें राहुल गांधी केरल में एक कार्यक्रम के दौरान मलयालम बोलने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. लेकिन वह उस शब्द को बोलने में अटक रहे हैं.  जिसके बाद उनके बोले गए शब्द का वीडिया सोशल मीडिया पर वायरल होता है. जानें इसके पीछे की कहानी.

दरअसल, केरल के चुनावी मैदान में राहुल गांधी की रैली हमेशा चर्चा में रहती है. लेकिन इस बार बात कुछ और ही हो गई. 30 मार्च 2026 को पथानामथिट्टा में जब राहुल मंच पर आए तो सबरीमाला मंदिर के सोने की चोरी का मुद्दा उठाया. भीड़ जोर-जोर से चिल्ला रही थी. राहुल ने अंग्रेजी में तो अच्छा बोल लिया, लेकिन मलयालम में कुछ वाक्य बोलने की कोशिश की तो सब कुछ गड़बड़ा गया. शब्द मुंह से निकले तो अटक-अटक कर, कुछ भूल गए और कुछ इतने टूटे-फूटे कि सुनने वाले भी हैरान रह गए. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग अपन-अपनी राय देने लगे.

इसके साथ ही पीएम मोदी के स्‍थानीय भाषा में बोलने की काबिलियत की भी चर्चा होने लगी. पीएम मोदी की बात करेंगे तो आप देखेंगे कि वह गुजरात, तमिलनाडु, बंगाल या केरल कहीं भी जाएं, स्थानीय भाषा में इतने सहज बोलते हैं कि लगता है वो उसी जगह के रहने वाले हैं. इसी तुलना में लोग  राहुल गांधी के मलयालम बोलने की कोशिश पर बात कर रहे हैं.

वीडियो में क्या है?

पठानमथिट्टा रैली के वीडिया में आप देखेंगे कि राहुल गांधी माइक पर खड़े होकर “स्वर्णं कट्टतु आराप्पा?” जैसा कुछ बोलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लय टूट गई. जिसके बाद राहुल गांधी के कई पुरानी रैलियों की बात होने लगी जहां अनुवादक ने राहुल की बात को बिगाड़ दिया था. लेकिन इस बार राहुल खुद मलयालम बोलने उतरे थे, इसलिए आलोचना और तेज हुई.



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