ममता बनर्जी के CRPF को धमकी एक्शन में चुनाव आयोग, मांगी फैक्चुअल रिपोर्ट

Date:


Last Updated:

दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी स्थित नंदप्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल के मैदान में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कथित वीडियो पर चुनाव आयोग (ECI) ने सख्त रुख अपनाया है. आरोप है कि ममता बनर्जी ने रैली में महिलाओं से अपील की है कि वे पोलिंग बूथ पर घरेलू रसोई के सामान (बर्तन-हथियार) लेकर पहुंचें और जरूरत पड़ने पर सीआरपीएफ (CRPF) जवानों से निपटें. इस कथित धमकी भरे वीडियो को लेकर चुनाव आयोग ने बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है.

Zoom

ममता बनर्जी ने रैली में सीआरपीएफ को खुलेआम धमकी दी. चुनाव आयोग एक्शन की तैयारी में (फोटो- @AITCofficial)

पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच एक बड़े राजनीतिक विवाद ने जन्म ले लिया है. मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी के एक कथित वीडियो को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. यह विवाद 25 मार्च को दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी में नंदप्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल के मैदान में आयोजित एक जनसभा से जुड़ा है. इस सभा में वे महिलाओं को बूथ पर रसोई का समान लेकर जाने के लिए उकसाती हुई दिख रही हैं. इस वीडियो पर चुनाव आयोग एक्शन मोड में आ गया है. मुख्य चुनाव आयोग ने राज्य और जिला निर्वाचन अधिकारियों से इसकी डिटेल्ड रिपोर्ट मंगाई है.

चुनाव आयोग का सख्त एक्शन
इस कथित वीडियो के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. शुक्रवार को आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से इस पूरी घटना की एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है. सूत्रों के मुताबिक, राज्य के सीईओ अब दार्जिलिंग के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को इस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच करने और जमीनी हकीकत का पता लगाकर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देंगे.

क्या है पूरा मामला?

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, एक वीडियो सामने आया है जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को ‘धमकाती’ नजर आ रही हैं. आरोप है कि जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने सभी महिलाओं और लड़कियों से खुलेआम अपील की कि वे भारी संख्या में मतदान केंद्रों (पोलिंग बूथ) पर मौजूद रहें. अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े तो महिलाएं सीआरपीएफ जवानों से ‘निपटने’ के लिए घरेलू रसोई के उपकरणों (जैसे बर्तन या अन्य सामान) का इस्तेमाल करें.

हिंसा और जवानों पर दर्ज होंगे केस?

इस बयान के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या ग्रामीण इलाकों के पोलिंग बूथों पर राजनीतिक दलों से जुड़ी महिलाओं और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है? इसके साथ ही यह चिंता भी जताई जा रही है कि यदि पुरुष सीआरपीएफ जवान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करते हैं, तो क्या उन पर किसी तरह की कानूनी या आपराधिक कार्रवाई हो सकती है?

किसी भी स्थिति से निपटने के लिए महिला सुरक्षा कर्मी भी होंगी शामिल

इस संवेदनशील मुद्दे पर तटस्थ दृष्टिकोण रखना आवश्यक है. भविष्य में किसी भी मतदान केंद्र पर हिंसा होगी या नहीं, इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और केंद्रीय बलों को संरक्षण प्रदान करने के लिए चुनाव आयोग के पास स्पष्ट दिशा-निर्देश होते हैं. महिला मतदाताओं की भीड़ या किसी भी प्रकार के टकराव को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए स्थानीय पुलिस (जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल होती हैं) और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है. इसलिए, सीआरपीएफ जवानों पर भविष्य में लगने वाले मुकदमों या हिंसा की अटकलें लगाना अभी पूरी तरह से काल्पनिक है.

CRPF पर ममता के बयान पर बीजेपी का पलटवार

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि एक तरफ घुसपैठियों और रोहिंग्या के लिए रेड कार्पेट, वहीं सुरक्षा एजेंसी का करो अपमान. ये टीएमसी की पहचान बन चुकी है. ये दिखाता है इनको संविधान , सुरक्षा एंजेसी का सम्मान नहीं है. टीएमसी का मतलब टोटल माफिया कल्चर बन चुका है. वहीं, अमित मालवीय ने लिखा, ‘पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में राम नवमी के मौके पर जंगीपुर की सड़कों पर जुलूस के दौरान भारी हिंसा हुई. इस जिले में 70% से ज़्यादा मुस्लिम आबादी है. ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के कई बॉर्डर जिलों को ऐसे इलाकों में बदल दिया है जहां हिंदू असुरक्षित महसूस करते हैं. अगर 2026 में तृणमूल को हटाया नहीं गया, तो वह दिन दूर नहीं जब बंगाली हिंदुओं को नया घर ढूंढना पड़ेगा. हम ममता बनर्जी को कामयाब नहीं होने दे सकते. हम उन्हें पश्चिम बंगाल की शानदार विरासत को कमज़ोर करने नहीं दे सकते.’

आगे क्या होगा?

चुनाव आयोग की प्राथमिकता राज्य में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है. किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय बलों के खिलाफ जनता को उकसाने वाले कथित बयान को चुनाव आचार संहिता (MCC) का गंभीर उल्लंघन माना जाता है. फिलहाल सभी की निगाहें चुनाव आयोग की तथ्यात्मक रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं.

About the Author

authorimg

Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related