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एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को टक्कर देने के लिए यूरोप की बड़ी कंपनी यूटेलसैट अब भारत की स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) की मदद ले रही है. स्पेस मार्केट में मस्क का दबदबा कम करने के लिए फ्रांस की इस कंपनी ने इसरो के साथ नई सैटेलाइट लॉन्चिंग को लेकर बातचीत शुरू कर दी है. भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते रक्षा और स्पेस रिश्तों का फायदा अब बिजनेस में भी दिखने लगा है.
इसरो का जलवा! मस्क पर निर्भरता कम करने के लिए फ्रांस की कंपनी ने भारत को चुना अपना पार्टनर (AI Photo)
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट की लीडर है. यूरोप की सबसे बड़ी सैटेलाइट कंपनी यूटेलसैट (Eutelsat) अब मस्क की स्पेसएक्स (SpaceX) पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है. यूटेलसैट के सीईओ ज्यां-फ्रांस्वा फालचर ने खुलासा किया है कि वे भविष्य के सैटेलाइट लॉन्च के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के साथ बातचीत कर रहे हैं. फ्रांस की इस कंपनी का मानना है कि केवल मस्क की रॉकेट तकनीक या यूरोप के एरियन रॉकेट्स पर निर्भर रहना समझदारी नहीं है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि गैर-यूरोपीय प्रोवाइडर्स पर पूरी तरह निर्भर होना ‘पागलपन’ है. भारत का इसरो अपने एलवीएम3 (LVM3) जैसे भरोसेमंद रॉकेट्स के जरिए दुनिया भर में अपनी धाक जमा चुका है. यही वजह है कि अब यूरोप मस्क को छोड़ भारत के पास आ रहा है.
वनवेब और इसरो के रिश्ते पुराने, क्या है मकसद?
- यूटेलसैट का साल 2023 में वनवेब (OneWeb) के साथ विलय हुआ था. वनवेब वही कंपनी है जिसमें भारत के भारती ग्रुप की बड़ी हिस्सेदारी है.
- रूस और यूक्रेन की जंग के बाद जब वनवेब ने रूसी सोयुज रॉकेट का इस्तेमाल बंद किया, तब इसरो ने ही उनकी मदद की थी. इसरो ने तब वनवेब के 72 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा था.
- यूटेलसैट के सीईओ फरवरी में भारत के दौरे पर भी आए थे. उन्होंने दिल्ली में टेलीकॉम मंत्री और रेगुलेटर्स से मुलाकात की है. कंपनी का लक्ष्य न केवल इसरो के रॉकेट्स का इस्तेमाल करना है, बल्कि भारत के बड़े इंटरनेट मार्केट में अपनी जगह बनाना भी है.
भविष्य की जरूरतों के लिए लॉन्चिंग कैपिसिटी पहले से बुक करना कंपनी की रणनीति का हिस्सा है. भारत का लक्ष्य साल 2033 तक अपनी स्पेस इकोनॉमी को 44 बिलियन डॉलर तक ले जाने का है.
क्या सैटेलाइट की संख्या से हार जाएगा स्टारलिंक?
- एयरबस कंपनी उनके लिए 440 नए सैटेलाइट्स बना रही है. यूटेलसैट का मानना है कि मुकाबला सैटेलाइट्स की संख्या का नहीं बल्कि तकनीक का है.
जब सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में ज्यादा ऊंचाई पर होते हैं, तो कम संख्या में भी वे बेहतर कवरेज दे सकते हैं. कंपनी ने पिछले साल 5 बिलियन यूरो की रिफाइनेंसिंग की है, जिससे उनके पास साल 2031 तक के लिए पर्याप्त फंड है.
यूटेलसैट को उम्मीद है कि 2030 तक उनके 440 नए सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग में 2 बिलियन यूरो खर्च होंगे. इसमें से 40 परसेंट हिस्सा लॉन्चिंग कॉस्ट का होगा, जिसे वे इसरो के जरिए किफायती बनाना चाहते हैं.
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दीपक वर्मा एक दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों औ…और पढ़ें





