रामनवमी का दिन है. देशभर में रामनवमी मन रही है. अयोध्या में खासतौर पर भगवान राम की पूजा हुई. क्या आपको मालूम है कि रामायण काल में क्या खाते पीते थे. इस दौर के वो कौन से खानपान हैं, जो आज भी हिट हैं. इसी तरह महाभारत की भी बात कर लेते हैं कि उस दौर के कौन से व्यंजन तब भी खाते थे और अब भी खाते हैं.
दरअसल हमारे खानपान की असली नींव तो रामायण और महाभारत काल से ही पड़ी है. उस समय के कई व्यंजन आज भी हमारे रसोई घरों का मुख्य हिस्सा हैं.वैसे आपको बता दें कि रामायण का समय एक अन्न बहुल युग था, जिसमें सुस्वादु पकवान खूब खाए जाते थे. वैसे आपको बता दें उस दौर में शाकाहार और मांसा
डॉ. एस. बालकृष्ण और सरोज बाला जैसे शोधकर्ताओं के अनुसार महाभारत का समय करीब 3102 ईसा पूर्व माना जाता है. वहीं रामायण को खगोलीय गणना के आधार पर 5114 ईसा पूर्व मानते हैं. हालांकि पुरातत्वविद थोड़ा अलग विचार रखते हैं. प्रसिद्ध पुरातत्वविद बी.बी. लाल ने हस्तिनापुर और कुरुक्षेत्र में खुदाई के दौरान ‘पेन टेड ग्रे वेयर’अवशेष पाए. इसके आधार पर महाभारत काल को 1000 ईसा पूर्व से 900 ईसा पूर्व के बीच रखा जाता है. वहीं कुछ इतिहासकार रामायण काल को 1500 से 2000 ईसा पूर्व के बीच रखते हैं, जबकि कुछ इसे और भी प्राचीन मानते हैं.
तो अब हम आपको बताते हैं कि कौन से खाने रामायण काल में भी थे. फिर ये महाभारत काल में खूब पसंद किए गए. हम अब भी उन्हें मन से पसंद करके खाते हैं. ये भी मान लीजिए इन दोनों दौर में लोग खाना बनाने में भी खूब एक्सपर्ट थे.
महाभारत और रामायण दोनों ही दौर में खीर बहुत पसंद की जाती थी और आज भी खीर का कोई तोड़ नहीं है. (AI News18 Image)
खीर तब भी हिट और अब भी
रामायण और महाभारत दोनों में ही ‘क्षीर’ यानि खीर या दूध से बनी मीठी चीज़ों का वर्णन मिलता है. राजा दशरथ द्वारा पुत्रकामेष्टि यज्ञ के बाद रानियों को दिया गया ‘चरा’ यानि खीर जैसा प्रसाद इसका प्रमाण है. आज भी भारत के हर शुभ अवसर पर खीर बनाई और खाई जाती है.
तब चावल के साथ जौ की भी खीर बनाई जाती थी. ऋग्वेद और शुरुआती वैदिक काल में जौ ही मुख्य अनाज था. इसलिए सबसे प्राचीन खीर जौ को दूध में पकाकर बनाई जाती थी. जैसे-जैसे चावल की खेती बढ़ी, ‘तण्डुल’ यानि चावल की खीर लोकप्रिय हो गई. रामायण में जिस ‘पायस’ या ‘क्षीर’ का उल्लेख है, वह अक्सर दूध, चावल और गुड़ का मिश्रण होता था. स्वाद के लिए इसमें इलायची, केसर और सूखे मेवों का प्रयोग किया जाता था, जो आज भी हमारी विधि का हिस्सा हैं.
अपूप यानि मालपुआ
ऋग्वेद काल से लेकर पौराणिक काल तक ‘अपूप’ का ज़िक्र आता है. यह घी में तला हुआ और शहद या गुड़ में डूबा हुआ एक मीठा पकवान था, जिसे आज हम मालपुआ के नाम से जानते हैं.
महाभारत काल में लोग अगर मालपुआ खाते थे और पसंद करते थे तो ऐसा ही रामायण के दौर में भी था. अब मालपुआ उतना ही हिट है. (AI News18 Image)
सत्तू हमेशा साथ
महाभारत काल में यात्री और सैनिक अपने साथ ‘सक्तु’ यानि सत्तू रखते थे, क्योंकि यह खराब नहीं होता था. तुरंत ऊर्जा देता था. आज भी उत्तर भारत, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश में सत्तू एक लोकप्रिय ‘सुपरफूड’ है.
दही-बड़ा यानि वटिका
प्राचीन ग्रंथों में दाल को पीसकर घी में तलने और फिर उसे दही में भिगोने का उल्लेख मिलता है, जिसे ‘वटिका’ कहा जाता था. यह आज के दही-बड़े का ही प्राचीन रूप है. इसे महाभारत और रामायण काल में खूब खाया जाता था.
पंचामृत और चरणामृत
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण पंचामृत कहलाता है. उस काल में देवताओं के भोग और स्वास्थ्य वर्धक पेय के रूप में उपयोग होता था, जो आज भी हर हिंदू पूजा का अनिवार्य हिस्सा है.
जो तब भी खाते थे और अब भी
जौ और गेहूं – उस समय जौ मुख्य अनाज था, जिसे आज हम जौ की रोटी या दलिया के रूप में खाते हैं.
दालें – मूंग, उड़द और मसूर की दालों का प्रयोग ‘सूप’ या ‘दाल’ के रूप में तब भी प्रचलित था.
फल – आम, केला और जामुन जैसे फलों का रामायण में ‘पंचवटी’ के प्रसंग में खूब विस्तार से बताया गया है.
सब्जियां – कद्दू, लौकी और अरबी जैसी सब्जियां उस काल से हमारे भोजन का हिस्सा हैं.
रामायणकाल में आर्य और वानरों का भोजन अलग तरह का था तो राक्षसों का अलग तरह का. (AI News18 Image)
क्या खाते थे रामायणकाल के लोग
आर्यों का खान -पान वानरों और राक्षसों से अलग था. आर्य मुख्य तौर पर शाकाहारी और कुछ हद तक मांसाहारी थे, वानर विशुद्ध शाकाहारी और राक्षस मुख्य तौर पर मांसाहारी थे. जब वन में भरद्वाज मुनि ने भरत के सैनिकों का स्वागत किया तो उनसे कहा आप अपनी इच्छानुसार सुरा-पान, मांस भक्षण और शाकाहार का सेवन करें. तब इस सेना को इतनी खीर दी गई कि इससे आश्रम के आसपास कीचड़ ही कीचड़ हो गया.
दूध दही का इस्तेमाल
दूध, दही, मक्खन और घी का खूब इस्तेमाल होता था. चीनी और मसालों में मिली हुई दही को रसाल या रायता कहते थे. उस दौर में सौवर्चल नाम का विशेष नमक इस्तेमाल किया जाता था. खाने में मिर्च, चटनी और खटाई का प्रयोग भी होता था. चीनी, गुड़ और शहद से मिठाइयां बनाई जाती थीं. फल भरपूर होते थे.
रामायण में आम, गन्ना, केला, खजूर, जामुन, अनार, नारियल, कटहल और बेर जैसे फलों का उल्लेख हुआ है. फलों का रस भी निकाला जाता था. कुछ पशु मेध्य थे यानि खाने लायक.
महाभारत दौर में वेज और नॉनवेज भी
शोध कहती हैं कि महाभारत दौर में लोग दोनों तरह का खाना खाते थे. जमकर दूध पीते थे. पांडव क्या खाते-पीते थे. उन्हें कौन से व्यंजन पसंद थे. खासकर तब जबकि वो निर्वासन में वनवास में रहने गए. मांसाहार को युधिष्ठर अपरिहार्य स्थितियों में उचित मानते थे.
पांडव पूरी तरह से शाकाहारी नहीं थे. उन्होंने निर्वासन के दौरान मांसाहारी भोजन किया और शाकाहाऱी खाना भी. ऐतिहासिक ग्रंथों से पता चलता है कि वे वनवास के दौरान हिरण और अन्य जानवरों का शिकार करते थे, जो उस दौर में क्षत्रियों के बीच आमबात थी. निर्वासन के दौरान उनके खाने में विविधता और बढ़ी. वो इस दौरान जिन क्षेत्रों से गुजरे, जहां रुके, वहां का खाना खाने लगे.
महाभारत काल में पांडव आमतौर पर शाकाहारी भी थे और मांसाहार से भी उन्हें कोई गुरेज नहीं था. वनवास में वह अक्सर शिकार करके मांसाहार का भोजन किया करते थे. (AI News18 Image)
महाभारत में पांडवों के आहार के हिस्से के रूप में मुर्गी और मछली सहित विभिन्न मांसाहारी व्यंजनों का भी उल्लेख है. प्राचीन भारत में मिश्रित भोजन होता था यानि शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के. अनुष्ठानों और खास कार्यक्रमों में मांसाहारी खाना पकता था.
हिरण भी शिकार करके खाया
पांडवों का भोजन मिश्रित था, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के खाद्य पदार्थ शामिल थे. वनवास में वो फलों, जड़ों से जुड़े खाद्य पदार्थ और अनाज भी खाते थे. ऐतिहासिक ग्रंथों से पता चलता है कि वे शिकार भी करते थे. मांस भी खाते थे. वनवास के दिनों में उन्होंने मुख्य रूप से हिरण का मांस खाया और मछलियों का सेवन किया. महाभारत में उल्लेख है कि पांडव कुशल शिकारी थे, जिसने उन्हें जंगल में रहने के दौरान शिकार से भोजन के लिए काफी आहार जुटाया.
भीम को कौन सा खाना पसंद था
भीम को मांस बहुत पसंद था, खास तौर पर हिरण. ये मांस खाने की क्षत्रिय परंपरा से मेल खाता है. वह खीर खूब खाते थे. महाभारत में ऐसे उदाहरण हैं जहाँ उन्होंने बहुत ज़्यादा मात्रा में खीर खा ली.
भीम को अवियल बनाने का श्रेय दिया जाता है, जो इमली और नारियल की ग्रेवी में कई तरह की सब्ज़ियों से बनी एक दक्षिण भारतीय सब्जी है. कहा जाता है कि इस व्यंजन की उत्पत्ति तब हुई जब उन्हें राजा विराट के वनवास के दौरान उनके अप्रत्याशित मेहमानों के लिए खाना बनाना पड़ा.
भीम लड्डू – उनसे जुड़ा एक और व्यंजन “भीम लड्डू” है, जो देसी घी और सूखे मेवों से बनी एक बड़ी मिठाई है, जिसे उनकी ताकत का स्रोत माना जाता है.
बहुत अच्छा खाना बनाते थे भीम
भीम पांडवों के निर्वासन के दौरान एक कुशल रसोइया बन गए. अपने भाइयों और मेहमानों के लिए भोजन तैयार करने की उनकी क्षमता ने रसोई में उनकी एक्सपर्टीज साबित की. वह खाना बनाने में काफी क्रिएटिव थे. इसमें प्रयोग करते रहते थे.




