महुआ का बयान और ममता बनर्जी की माफी, क्या गुजराती वोटर्स इस बार भवानीपुर में मुख्यमंत्री की सीट फंसा देंगे?

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महुआ का बयान और ममता की माफी, क्या गुजराती वोटर्स भवानीपुर में बिगाड़ेंगे खेल?

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Mamata Banerjee Bhawanipur seat: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच भवानीपुर सीट पर ‘गुजराती अस्मिता’ का मुद्दा गरमा गया है. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा गुजरातियों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बैकफुट पर आना पड़ा है. भवानीपुर की 30% गुजराती आबादी क्या ममता को इस चुनाव में नंदीग्राम जैसा झटका देंगे? क्या बीजेपी इस मुद्दे को चुनाव ततक जिंदा रखेगी?

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भवानीपुर की 30% गुजराती आबादी क्या ममता को इस चुनाव में नंदीग्राम जैसा झटका देंगे?

भवानीपुर विधानसभा सीट : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनावी मैदान में हैं. लेकिन इस बार उनकी जीत की राह में उनके ही दल की सांसद महुआ मोइत्रा का एक बयान ‘कांटा’ बन गया है. महुआ मोइत्रा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गुजरातियों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ‘काला पानी की सजा काटने वालों में 68% बंगाली थे, क्या आप किसी एक गुजराती का नाम बता सकते हैं?’ इस बयान ने भवानीपुर के शांत चुनावी माहौल में अस्मिता की आग सुलगा दी है. क्योंकि भवानीपुर सीट से ममता की हार-जीत में गुजराती वोटर्स अहम रोल अदा कर सकते हैं. हालांकि, ममता ने महुआ के बयान पर माफी मांग ली, लेकिन क्या यह माफी भवानीपुर में मुख्यमंत्री की सीट निकाल देगी या फंसा देगी?

भवानीपुर को कोलकाता का ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है. यहां की जनसांख्यिकी को समझना ममता बनर्जी के लिए बेहद जरूरी है. भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में गुजराती भाषाई मतदाताओं की आबादी लगभग 30% से 34% के बीच है. भवानीपुर के वार्ड नंबर 70, 71 और 72 में गुजराती और अन्य गैर-बंगाली समुदायों का दबदबा है. यह समुदाय परंपरागत रूप से व्यवसाय से जुड़ा है और शांतिपूर्ण माहौल को प्राथमिकता देता है. महुआ के बयान ने इस बड़े वोट बैंक को नाराज कर दिया है. हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि हवा का रुख अगर बीजेपी के फेवर में बंगाल में बहेगा तो फिर यहां गुजराती वोटर्स खेला कर दें तो हैरानी नहीं होगी. क्योंकि ज्यादातर गुजराती व्यवसाय से जुड़े हैं इसलिए वह टीएमसी से पंगा नहीं लेंगे. क्योंकि बंगाल का पुराना अतीत रहा है चुनाव के बाद हिंसा शुरू हो जाती है. पार्टी कार्यकर्ता एक-दूसरे पर हमला करने लगते हैं.

ममता बनर्जी जानती हैं कि 2021 के उपचुनाव में उन्हें भवानीपुर से जो बड़ी लीड मिली थी, उसमें गुजराती और मारवाड़ी समुदाय का बड़ा योगदान था. स्थानीय पार्षद असीम बोस और टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है. टीएमसी अब भवानीपुर की दीवारों पर गुजराती भाषा में स्लोगन लिख रही है ताकि इस समुदाय को मनाया जा सके. वहीं शुभेंदु अधिकारी और भाजपा ने इसे ‘महात्मा गांधी और सरदार पटेल’ का अपमान बताते हुए चुनावी मुद्दा बना दिया है.

सांसद महुआ मोइत्रा का एक बयान क्या ममता बनर्जी के लिए ‘कांटा’ बन गया? (फाइल फोटो)

क्या गुजराती वोटर्स बनेंगे हार की वजह?

2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से हारने के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर अपनी कुर्सी बचाई थी. 2026 में स्थिति अलग है. स्थानीय जैन और गुजराती समुदायों के प्रतिनिधियों ने महुआ के बयान को ‘अपमानजनक’ बताया है. भाजपा इस बार भवानीपुर में गैर-बंगाली वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है. यदि 30% गुजराती मतदाता सामूहिक रूप से नाराज होते हैं, तो ममता बनर्जी के लिए अपनी ही सीट बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ममता बनर्जी एक ‘सेंटीमेंटल’ नेता के रूप में खुद को पेश कर रही हैं, लेकिन महुआ मोइत्रा के ‘गुजराती कौन हैं?’ वाले सवाल ने उनकी ‘सबका साथ’ वाली छवि को नुकसान पहुंचाया है. भवानीपुर में 23 अप्रैल को होने वाली वोटिंग यह तय करेगी कि क्या माफीनामा काम आया या फिर ‘गुजराती गौरव’ ममता की चुनावी नैया को डुबो देगा.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें



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