नई दिल्ली. एक समय था जब क्रीज पर खड़ा बल्लेबाज वरुण चक्रवर्ती की उंगलियों को किसी पहेली की तरह सुलझाने की कोशिश करता था. उनकी ‘कैरम बॉल’ और ‘लेग कटर’ के मिश्रण ने दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था लेकिन क्रिकेट की दुनिया क्रूर है, यहाँ ‘मिस्ट्री’ की एक्सपायरी डेट बहुत जल्दी आती है.
आज आईपीएल के गलियारों में चर्चा है कि क्या वरुण चक्रवर्ती दूसरे अजंता मेंडिस बन गए हैं? जिस तरह श्रीलंका के मेंडिस ने अपनी मिस्ट्री से तहलका मचाया और फिर अचानक बल्लेबाजों के लिए आसान शिकार बन गए, कुछ वैसा ही हाल अब कोलकाता नाइट राइडर्स के इस स्टार स्पिनर का नजर आ रहा है.
डिकोड हो गई चक्रवर्ती की ‘मिस्ट्री’?
आंकड़े झूठ नहीं बोलते और वरुण चक्रवर्ती के मामले में तो ये चीख-चीख कर कह रहे हैं कि बल्लेबाजों ने उनकी गेंदबाजी को ‘डिकोड’ कर लिया है किसी भी मिस्ट्री स्पिनर की ताकत उसकी अनिश्चितता होती है, लेकिन जब बल्लेबाज आपकी रिलीज पॉइंट और उंगलियों की हरकत को पकड़ ले, तो आप एक साधारण गेंदबाज बनकर रह जाते हैं. पिछले कुछ मैचों में देखा गया है कि बल्लेबाज अब वरुण के खिलाफ रक्षात्मक होने के बजाय, उन पर हावी होकर खेल रहे हैं. वे अब गेंद के टर्न होने का इंतजार नहीं करते, बल्कि लेंथ को भांपकर पहले ही बड़े शॉट के लिए तैयार रहते हैं.
खौफनाक आंकड़े: इकॉनमी और रन रेट का दबाव
वरुण चक्रवर्ती की गेंदबाजी में जो पैनापन 2020 और 2021 के सीजन में था, वह अब गायब दिख रहा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक है. पिछले 6 मैचों का रिपोर्ट कार्ड देखें तो वरुण ने अपने पिछले 6 मुकाबलों में लगभग 273 रन लुटाए हैं. सबसे हैरान करने वाली बात उनकी 11 की इकॉनमी है. टी-20 जैसे छोटे फॉर्मेट में, जहाँ एक स्पिनर का काम रन गति पर अंकुश लगाना होता है, वहां 11 रन प्रति ओवर देना टीम के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है. मौजूदा सीजन की शुरुआत भी इस आईपीएल में अब तक उन्होंने कुल 6 ओवर फेंके हैं, जिनमें उन्होंने 79 रन खर्च कर दिए हैं. बदले में उनके खाते में आया है सिर्फ 1 विकेट. यह प्रदर्शन उस गेंदबाज के कद के मुताबिक कहीं नहीं ठहरता जिसे केकेआर ने भारी भरकम रकम पर रिटेन किया था.
अजंता मेंडिस से तुलना क्यों?
अजंता मेंडिस ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था, तो उन्हें खेलना लगभग असंभव माना जाता था लेकिन जैसे ही वीडियो एनालिटिक्स और तकनीक का दौर बढ़ा, बल्लेबाजों ने उनके हाथ को पढ़ना शुरू कर दिया, मेंडिस के पास जब ‘प्लान-बी’ की कमी दिखी, तो उनका करियर ढलान पर आ गया. वरुण चक्रवर्ती भी आज उसी मोड़ पर खड़े हैं अगर वे अपनी गेंदबाजी में कुछ नया नहीं जोड़ते या अपनी गति और लेंथ में बदलाव नहीं करते, तो वे इतिहास के पन्नों में एक ‘वन सीजन वंडर’ बनकर रह जाएंगे.
वापसी की चुनौती
केकेआर के लिए वरुण चक्रवर्ती एक मैच विनर रहे हैं, लेकिन मौजूदा फॉर्म टीम के संतुलन को बिगाड़ रही है क्या वरुण अपनी खामियों पर काम कर वापसी करेंगे या बल्लेबाजों का यह प्रहार उनके करियर पर पूर्णविराम लगा देगा? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल ‘मिस्ट्री स्पिनर’ के नाम से रहस्य गायब हो चुका है और सिर्फ रन लुटाने का सिलसिला बाकी है.


