बहराइच: स्मार्ट मीटर को लेकर यूपी के अलग-अलग जिलों से आए दिन विरोध की सूचनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन गजब तो तब हो गया जब यूपी के बहराइच जिले में एक विद्युत उपभोक्ता की दुकान पर लगा स्मार्ट मीटर एडवांस बैलेंस होने के बावजूद भी बिजली सप्लाई नहीं दे रहा है. बिजली विभाग के चक्कर काट-काटकर उपभोक्ता पस्त हो गया है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
यूपी के अलग-अलग जिलों से आती रहती हैं स्मार्ट मीटर की खबरें
स्मार्ट मीटर आने के बाद से ही विद्युत उपभोक्ताओं के विरोध की खबरें लगातार सामने आती रही हैं. लोग आरोप लगाते हैं कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग तेज चलती है, जिससे वास्तविक खपत से अधिक बिजली बिल आता है. इसके अलावा भी कई शिकायतें सामने आती रहती हैं, जिसके चलते लोग विरोध करते नजर आते हैं.
बहराइच में स्मार्ट मीटर को लेकर सामने आया अजब मामला
स्मार्ट मीटर को लेकर बहराइच जिले में भी कई छोटी-छोटी घटनाएं सामने आ चुकी हैं. लोग अक्सर आरोप लगाते हैं कि मीटर तेज चलता है. लेकिन हद तो तब हो गई जब बहराइच शहर के मोहल्ला चांदपुरा स्थित शाहीन मार्केट के सामने एक उपभोक्ता अर्सलान ने गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि बकाया जमा करने के बावजूद स्मार्ट मीटर में सप्लाई तो आती है, लेकिन वह उनकी दुकान तक नहीं पहुंचती. बीच में ही सप्लाई रोक दी जाती है. उनका कहना है कि सिस्टम पूरी तरह फेल है.
शिकायत के बाद भी बाधित रही बिजली आपूर्ति
उपभोक्ता अर्सलान का कनेक्शन कमर्शियल है. दुकान पर मौजूद रानू नाम के व्यक्ति ने बताया कि चार दिन पहले बिजली कट गई थी, क्योंकि कुछ राशि बकाया थी. इसके बाद स्मार्ट मीटर में रिचार्ज कराया गया, जिससे कुछ समय के लिए बिजली आई, लेकिन शाम को फिर चली गई. वर्तमान में स्मार्ट मीटर में लगभग ₹2300 का एडवांस बैलेंस मौजूद है, इसके बावजूद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई है.
बिजली विभाग के चक्कर काट रहा उपभोक्ता
उपभोक्ता ने इसकी शिकायत संबंधित पावर हाउस में की, जहां से उसे गोंडा का नंबर दिया गया. जब उपभोक्ता ने गोंडा बिजली विभाग से संपर्क किया, तो उसे केवल आश्वासन मिलता रहा.
शायद यही वजह है कि लोग स्मार्ट मीटर से दूरी बना रहे हैं. आमतौर पर स्मार्ट मीटर का मतलब होता है रिचार्ज करते ही सेवा शुरू, लेकिन यहां स्थिति उलट नजर आ रही है. रिचार्ज न होने पर बिजली बंद होना तो समझ में आता है, लेकिन रिचार्ज होने के बाद भी सप्लाई न मिलना बड़ी समस्या बन गई है. अब देखने वाली बात यह है कि इस तरह की समस्याओं का समाधान कब तक किया जाता है.





